‘का चचा वोट दे देला... के के देला हो, अब त बता दा... अब त सब बीत गइल...।’ मिर्जामुराद स्थित किसान इंटर कॉलेज के बाहर जब राजू ने 70 वर्षीय खरपत्तू से यह सवाल पूछा तो मुस्कुराते हुए उनका कहना था कि ‘भइया हो जे जीती समझ लिहा ओही के ओटवा देली हौ।’
यह कह कर खरपत्तू आगे बढ़े और बुदबुदाने लगे कि ‘आज के लइका अपने के ढेर चतुर समझत हउअन। हम 40 साल से ओट डारत हई त बुड़बक हई और ई ढेर हुशियार हउअन। हम ऐनके चौराहे पर बताई के केके ओट देले हई और सबसे बुरा बनी।’
मतदान की शुरुआत के लगभग दो घंटे बाद नौ बजे से ही मतदान केंद्रों के बाहर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता यह टोह लेने में जुट गए थे कि कौन, किसे वोट दे रहा है और माहौल कैसा है। जो खुले तौर पर जिस दल का समर्थक था वह तो खुशी-खुशी बता रहा था कि अपने प्रत्याशी को वोट देकर आ रहा हूं लेकिन आम मतदाताओें ने अपने पत्ते नहीं खोले।
चाहे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता हों या पत्रकार, सभी के सवालों पर आम मतदाता मुस्कुरा कर यही कह रहे थे कि जिसे भी जीत मिलेगी समझ लीजिएगा कि हमने उसी को वोट दिया।
पुलिस की कड़ाई के चलते जिले के ग्राम्यांचल की चट्टी-चौराहों की अधिकांश दूकानें सुबह नौ बजे तक बंद हो गई थी। इसके चलते मतदान केंद्रों के बाहर और कस्बों, चौराहों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी चाय और नाश्ता के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। हालांकि ग्रामीणों ने सुरक्षाकर्मियों को पानी वगैरह के लिए परेशान नहीं होने दिया।
दोपहर तीन बजे के बाद से चट्टी-चौराहों पर चाय और नाश्ता की दूकानें एक-एक कर खुलनी शुरू हुई और हलचल दिखाई दी। उधर, मतदान केंद्रों के बाहर, कस्बों और बाजारों में तैनात पुलिसकर्मी भी आमजन से इस बार के अब तक के अपने चुनावी अनुभव को बताने में लगे थे। वहीं, मतदान के चलते ग्रामीण इलाकों में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए सवारी वाहन बड़ी मुश्किल से मिल रहे थे।
मतदान शुरू होते ही प्रकाश की कमी, दबाव बनाकर वोट डलवाने, सूची से नाम कटने, बीएलओ की देरी और मनमानी, बूथ पर विकलांगों के लिए व्यवस्था न होने, पीने के पानी की व्यवस्था न होने जैसी अन्य शिकायतें शाम तक यूपी पुलिस और वाराणसी पुलिस से ट्वीटर पर की जाती रही।
पुलिस ने भी किसी को निराश नहीं दिया और सभी ट्वीट का जवाब दिया और जो शिकायत को दूर कर सकता है उस अधिकारी को इत्तला भी किया। त्वरित कार्रवाई पर कई ट्वीटर यूजर्स ने संतोष जताया और पुलिस की वाहवाही की।
वहीं, मतदान के दिन भी वाट्सएप सहित सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों पर प्रत्याशियों के समर्थकों का प्रचार-प्रसार जारी रहा।