विश्वनाथ मंदिर प्रशासन पर दोहरी नीति अख्तियार करने का आरोप
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में प्रस्तावित गंगा दर्शन पाथ-वे योजना का विरोध और तेज हो गया है। मंदिर प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए धरोहर बचाओ संघर्ष समिति ने इस योजना के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला किया है।
समिति की ओर से जल्द ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की जाएगी। गुरुवार को सरस्वती फाटक स्थित त्रिमूर्ति गेस्ट हाउस में तीन घंटे तक चली लंबी मंत्रणा के बाद संघर्ष समिति ने यह निर्णय लिया।
मंदिर प्रशासन की कथनी और करनी में अंतर का आरोप लगाते हुए समिति ने कहा कि रेड जोन से गंगा घाट तक पक्का महाल के पुरातन स्वरूप से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने इस मामले में कानूनविदों से राय लेने का निर्णय लिया। तय हुआ कि पीआईएल दाखिल करने के अलावा पक्का महाल क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान चलाकर आम जनता को इस आंदोलन से जोड़ा जाएगा।
इस पर भी चर्चा हुई कि पाथ-वे के लिए चिह्नित 166 भवनों के खिलाफ किसी तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई तो इलाके के प्रमुख मंदिरों पर ताला जड़ दिया जाए। रविवार को समिति इस बारे में धर्माचार्यों के सुझाव के आधार पर निर्णय लेगी।