इसके पूर्व अंतिम निशा की पहली प्रस्तुति बेंगलुरू से जुड़ी श्रीविद्या के कुचिपुड़ी नृत्य की रही। उन्होंने मंदोदरी प्रसंग केजरिए मनमोहक नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। इसके पश्चात उन्होंने आचार्य कृष्ण राय देव द्वारा रचित मंडूक शबदम की भावपूर्ण प्रस्तुति से हनुमत दरबार में अपनी सशक्त उपस्थित दर्ज कराई। इसकेबाद अगली प्रस्तुति में किराना घराने के वरिष्ठ कलाकार पं. नागराज हवलदार एवं उनके पुत्र ओंकार हवलदार स्वरांजलि की अभ्यर्थना के लिए संकटमोचन दरबार से जुड़े।
उन्होंने राग गोरख कल्याण में विलंबित एकताल एवं मध्य लय तीन ताल में बाजे मुरली मन बांवरा...की सुमधुर प्रस्तुति से श्रोताओं को भी भावों से भर दिया। इसके बाद उन्होंने राग भैरवी की रचना जय हो करुणानिधे सुनाया। इसके बाद मुंबई से पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य एवं बांसुरी वादक विवेक सोनार ने जब बंशी की मधुर तान छेड़ी तो हर कोई सम्मोहित सा हो गया। कमेंट बाक्स में तो बधाईयों के तांते लग गए।
हर किसी ने बांसुरी और तबले की युगलबंदी की जी भर सराहना की। उन्होंने राग हंसध्वनि में अद्धा ताल और दु्रत तीन ताल में निबद्ध बंदिश की सुमधुर प्रस्तुति दी। अगली प्रस्तुति के लिए पं. हरीश तिवारी को दिल्ली से जुड़ना था लेकिन दिल्ली में कोरोना के बिगड़े हालात को देखते हुए वह देवरिया शिफ्ट हो गए और वहीं से अपनी प्रस्तुति दी।
इस निशा की अंतिम प्रस्तुति मेडोलिन और ड्रम की जुगलबंदी रही। मेडोलिन वादक यू राजेश और ड्रमर शिवमणि का सदाबहार अंदाज श्रोताओं को आनंदित कर गया। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।