आशुतोष मिश्र ने रात भर बच्चे भूख से छटपटाते रहे। सुबह पास में दूध निकाल रहे ग्रामीण ने तो उन्हें आधा लीटर दूध दिया। महाराष्ट्र से आ रहे यात्री राजेश ने बताया कि सोमवार की रात दस बजे हमें बस यहां उतार कर वापस चली गई। अब यहां से पूरे जिले के यात्री पैदल ही अपने घर जाए।
प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को यही डर है दूसरे प्रान्तों से तो हम जान बचा कर अपने जिले में पहुंच गए, कहीं घर पहुंचाने से पहले हमारे प्राण न निकल जाए। सुबह यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू की गई, मगर नाश्ते व चाय की कोई व्यवस्था नहीं थी। यात्री अपना थर्मल स्क्रीनिंग करा कर स्वयं ही गंतव्य की तरफ रवाना हो गए।