काल भैरव मंदिर प्रबंधन द्वारा बाबा को वस्त्र, काला गंडा, फूल मालाओं से विधिवत श्रृंगार कर भव्य आरती उतारी गई। आस्था की पराकाष्ठा इस कदर कि बरात को दो किलोमीटर का मार्ग तय करने में कई घंटे लग गए। शाम 5 बजे निकली बरात भोर तक अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचेगी।
रास्ते भर जश्न का माहौल, सजे मंदिर
विशेश्वरगंज से लेकर कज्जाकपुरा तक बरात मार्ग में सभी मंदिरों में विशेष सजावट की गई थी। हर कोई लगातार पलक पांवड़े बिछाए बरात की प्रतीक्षा कर रहा था। हाथों में पुष्पाहार, पूजन सामग्रियों सहित आरती की थाल लिए घंटों बाद भक्तों को बाबा के दूल्हा स्वरूप में दर्शन मिला। बरात के दौरान काशी विश्वनाथ डमरू दल, श्री लाट भैरव डमरू दल सहित कई डमरू दलों के लगभग सैकड़ों सदस्य शोभायात्रा में डमरू निनाद करते चल रहे थे।