मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वरुणा कॉरिडोर’ की महत्वाकांक्षी परियोजना को अधिकारी अपनी मनमानी से पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। नदी का तट बांधकर उसके प्राकृतिक स्वरूप और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र से छेड़छाड़ की जा रही है। जबकि हाईकोर्ट ने गुरुवार को सशर्त गंगा के दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण पर लगी रोक हटाते हुए लोगों को थोड़ी राहत तो दी लेकिन धरोहर स्वरूप गंगा घाटों और पुरानी इमारतों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न करने की हिदायत भी दी है। ऐसे में काशी की धरोहर वरुणा के मौलिक स्वरूप में परिवर्तन भला कैसे किया जा सकता है, यह सवाल देश के पर्यावरणविदों को मथने लगा है। कुछ तो वरुणा को पुनर्जीवित करने के नाम पर हो रही मनमानी रोकने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी भी करने लगे हैं। इधर, नदी का प्राकृतिक स्वरूप बरकरार रखते हुए उसे सुंदर बनाए जाने को लेकर अमर उजाला में खबरें प्रकाशित होने के बाद नींद से जागे सिंचाई विभाग के अफसरों ने वरुणा के डूब क्षेत्र पर कब्जा करने वाले सौ लोगों को नोटिस थमा दिया है। इसी तरह हरकत में आए वीडीए के अफसरों ने भी नदी किनारे 50 मीटर के दायरे में नए सिरे से सर्वे कर सीमांकन करने की तैयारी कर ली है। क्या सरकारी मशीनरी के मकड़जाल में उलझी वरुणा खुलकर सांस ले पाएगी....?
वरुणा नदी के डूब क्षेत्र पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सिंचाई विभाग ने ऐसे सौ लोगों को नोटिस जारी कर दिया है। अवैध निर्माण चिह्नित करने और सीमांकन के लिए दो राजस्व टीमें भी गठित कर दी गई हैं। दरअसल, हाईकोर्ट की गंगा घाटों के किनारे ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत पर लगी रोक पर मौलिकता बरकरार रखते हुए निर्माण की अनुमति ने अफसरों को हिलाकर रख दिया है। कानून के जानकार मानते हैं कि गंगा के लिए जो हाईकोर्ट का रुख है वही रुख वरुणा के लिए भी हो सकता है। फिलहाल नदी की प्रकृति से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कुछ संगठन कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में लगे हैं।
सिंचाई विभाग ने नदी के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले और बगैर शोधन के सीवर का पानी वरुणा में गिराने वाले 100 लोगों को चिह्नित कर नोटिस थमाया है। इन लोगों को डूब क्षेत्र से अपना अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया है। इसकी प्रक्रिया के बाद अवैध निर्माण को हटवाया जाएगा। साथ ही सिंचाई विभाग ने नियमित प्रक्रिया के तहत ज्ञानपुर पंप कैनाल से पानी छोड़ा है ताकि सिंचाई के लिए किसानों को पानी मिल सके। पशु-पक्षियों को भी गरमी में दिक्कत न होने पाए। राजस्व विभाग की ओर से अतिक्रमण और नदी किनारे 50 मीटर दायरे में निर्माण का सीमांकन करने के लिए दो टीम गठित की गई है।
वरुणा किनारे अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ देर से सही पर वीडीए की नींद टूट गई है। नदी किनारे अवैध ढंग से कब्जा कर आशियाना बनाने वालों की खैर नहीं होगी। ऐसे भवनों को चिह्नित करने के लिए शुक्रवार को वीडीए के सचिव एमपी सिंह ने 14-14 सदस्यीय दो टीमें गठित कर दी है। वीडीए की इस कार्रवाई से कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है। गठित टीम शुक्रवार से वरुणा किनारे 50-50 मीटर के दायरे में बने अवैध भवनों का सर्वे कर सीमांकन करेगी। वीडीए के अधिशासी अभियंता गोपाल कृष्ण और राजकुमार को एक-एक टीम की जिम्मेदारी दी गई है। टीम के सदस्य सीमांकन करेंगे और इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करेंगे। दरअसल बुद्ध विहार कालोनी में नदी के पेटा में दीवार खड़ी कर दी गई है। हाल यह है कि वहां जेसीबी चलाना मुश्किल हो गया है। वीडीए ने अतिक्रमण के नाम पर खानापूर्ति कर पल्ला झाड़ लिया था। ऐसा ही हाल खजुरी में नदी किनारे तक मकान बन चुका है। आगे जेसीबी नहीं चल पा रहा है।