चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को तीन से सात जून तक ईवीएम हैक करके दिखाने की चुनौती दी है। इसके पहले विधान सभा चुनाव के बाद से ही कई राजनीतिक दल ईवीएम हैक होने को लेकर हो हल्ला कर रहे हैं। ऐसे में इस खुली चुनौती के बाद परिणाम देखने को लेकर लोग लालायित हैं।
हालांकि अधिकतर लोगों का मानना है कि ईवीएम हैक नहीं हो सकता। वहीं पिछले दिनों एक राजनीतिक दल द्वारा ईवीएम को हैक किए जाने का वीडियो यू ट्यूब पर चलने के बाद लोगों के मन में शक हो गया लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के चैलेंज के बाद मुकाबला दिलचस्प दिख रहा है।
सुभाषनगर निवासी सुनीता तिवारी कहती हैं कि देश में पिछले दो दशक से ईवीएम से चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में अचानक ईवीएम पर सवाल उठाना हास्यास्पद है। चुनाव आयोग ने ठीक ही किया है चुनौती देकर। इससे ऐसे दलों के मुंह पर ताला लग जाएगा।
इसी तरह इलिया निवासी निरूपमा केशरी कहती हैं कि आम आदमी पार्टी और बसपा ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं लेकिन इसी ईवीएम के सहारे जहां दिल्ली में आप ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई वहीं इसी ईवीएम के सहारे ही बसपा भी बहुमत की सरकार बना चुकी है।
चकिया रोड निवासी सलमान कहते हैं कि ईवीएम हैक होना मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नहीं है, क्यों कि वह भी मशीन ही है। राजनीतिक दल लगातार सवाल उठा रहे हैं उसका भी कोई मतलब है। परीक्षण में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
सुभाषनगर निवासी जितेन्द्र कुमार पांडेय कहते हैं कि जिस तरह से पिछले दो माह से इसको लेकर हो हल्ला चल रहा है। ऐसे में इस तरह के परीक्षण की आवश्यकता है। इससे सभी के मन की शंका दूर हो जाएगी।