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पतित पावनी के गले में दमका दीपों का हार

Tue, 15 Nov 2016 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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दशाश्वमेध घाट
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उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर पूनम का चांद सोमवार की शाम दीपों की अल्पनाओं, रंगोलियों, रंग-बिरंगी लतरों और कतारबद्ध लड़ियों के बीच झिलमिलाता, शरमाता नजर आया। दीपमालाओं में नेपाल से मित्रता, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता के साथ ही विश्व शांति, प्रेम के भाव सजाए गए। किसी घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक, स्वच्छ भारत अभियान सजा तो कहीं ऊं और स्वास्तिक के प्रतीकों में दीपोत्सव की छटा निखरी। अस्सी से राजघाट तक घाटों, सीढ़ियों, मढ़ियों, मंदिरों के शिखरों, महलों की प्राचीरों को टिमटिमाते दीपों से जगमग किया गया। दशाश्वमेध घाट के अलावा शीतला घाट पर गंगोत्री सेवा समिति के भव्य मंच पर संगीतमय गंगा आरती के साथ दीप जले।
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सांझ ढलते ही गंगा की लहरों पर पूर्णिमा का चांद इठलाने लगा तो घर-घर से निकलीं महिलाएं, युवक-युवतियों ने घाटों की सीढ़ियों, मढ़ियों पर दीपज्योति के जरिए राष्ट्रीय घटनाओं, नारों, संदेशों को अल्पनाओं में उकेर कर सजाना शुरू कर दिया। शाम साढ़े पांच बजे तक देखते-देखते गंगा का सात किमी का किनारा जगमगा उठा। राणामहल घाट पर ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक को दीयों से सजाया गया था। इसी तरह दरभंगा घाट पर स्वच्छ भारत अभियान के नारे के साथ बापू का चश्मा सजाया गया था। चौसट्ठी घाट, पांडेय घाट पर स्वास्तिक, कलश की रंगोली बनाई गई थी। जैन घाट पर अहिंसा परमो धर्म का संदेश दीयों से दिया गया। तुलसी घाट नेपाल-भारत मैत्री के संदेश के साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक पर दीये जगमगाए। शीतला घाट पर पं. किशोरी रमण दूबे बाबू महाराज, महामंडलेश्वर भवानी शंकर यति की मौजूदगी में गंगा का दुग्धाभिषेक हुआ। सुशील बावेजा ने भजन पेश किए। यहां उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने अध्यक्षता की। भदैनी में लोगों ने तुलसीघाट मोड़ के पास वट वृक्ष को गणेश की प्रतिमा का रूप दे दिया था। घाटों पर जलते दीयों की रोशनी के साथ तमाम लोगों ने सेल्फी भी ली।


गंगा की लहरों पर नावों-बजड़ों के झुंड इस कदर चले कि जल मार्ग पर भी ट्रैफिक जाम होने लगा। जल परी वाला सुसज्जित बजड़ा हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सैकड़ों नावों को गेंदा, गुलाब के फूलों से सजाकर उतारा गया। विदेशी पर्यटकों ने देव दीपावली के इस नजारे को कैमरे में खूब कैद किया। विदेशियों के समूह नावों-बजरों पर सवार होकर अस्सी से राजघाट तक की सैर करते दिखे।
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