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आबोहवा अभी से खराब, पटाखे और बिगाड़ेंगे काम

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वाराणसी। शहर की हवा इन दिनों सेहत के लिए नुकसानदायक है। ऐसे में आगामी दिनों में जब दिवाली पर तेज आवाज और धुएं वाले पटाखे छोड़े जाएंगे तो यह वायु प्रदूषण के लिए आग में घी का काम करेंगे। इसे लेकर शहर की सामाजिक संस्थाओं से जुड़े युवाओं का कहना है कि कोरोना काल की इस दिवाली में हमें वायु प्रदूषण और दमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों का ध्यान रखते हुए पटाखों से परहेज करना चाहिए। दीया जलाकर भी दिवाली अच्छे से मनाई जा सकती है।
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रसायनों की वजह से पटाखे हो जाते हैं खतरनाक
जानकारों के अनुसार पटाखों में जिन रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, उनकी वजह से वह खतरनाक हो जाते हैं। पटाखे में कॉपर, कैडियम, लेड, मैगनीशियम, सोडियम, जिंक, नाइट्रेट और नाइट्राइट जैसे रसायन के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है। इस वजह से यह 125 डेसिबल से ज्यादा आवाज पैदा करते हैं। इसके चलते पटाखों की आवाज और निकलने वाला धुआं दोनों नुकसानदायक होता है।
ध्वनि-वायु प्रदूषण को ध्यान में रखकर बिकेंगे पटाखे : डीएम
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि ध्वनि और वायु प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए दिवाली पर पटाखों की बिक्री कराई जाएगी। इसके लिए गाइडलाइन तैयार की गई है। इंसान के साथ ही पशु-पक्षियों की सेहत के लिए नुकसानदायक पटाखे जिले में नहीं बिकेंगे, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मजिस्ट्रेटों और थानेदारों की होगी। इसके साथ ही अवैध तरीके से पटाखे बनाने, बेंचने और भंडारण करने वालों के खिलाफ अभियान चला कर कार्रवाई की जाएगी।
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पटाखों की दुकान लगाने के ये हैं मानक
- पटाखों की दुकान खुले में हो और दुकानों के बीच दूरी हो।
- बिजली का तार ऊपर से न गुजरा हो और अलग-बगल ट्रांसफार्मर न हो।
- दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन उपकरण जरूर हो।
- दुकान में बालू से भरी दो बाल्टी और पानी भरे ड्रम के अलावा अतिरिक्त बालू व बेलचा रखा हो।
- दुकान में लालटेन, लैंप या मोमबत्ती न हो और वायरिंग अधिकृत लाइनमैन द्वारा ही की गई हो।
पटाखों पर प्रतिक्रिया
तेज आवाज और रोशनी वाले पटाखे कई तरह का प्रदूषण पैदा करते हैं और इससे सिर्फ हमारा ही पशु पक्षियों का भी नुकसान होता है। बेहतर यही होगा कि हम दीया जलाकर और एक-दूसरे को फल देकर दिवाली मनाएं। - चेतन उपाध्याय, सत्या फांउडेशन
लोग हजारों रुपये के पटाखे चंद मिनट में जलाकर खाली हो जाते हैं। बदले में हमें प्रदूषण जैसी समस्या मिलती है। अच्छा होगा कि पटाखे से परहेज कर उन्हीं पैसों से आसपास के वंचित लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाई जाए। - दिव्यांशु उपाध्याय, होप सामाजिक संस्था
दीपावली दीपों का त्योहार है। इस बार अधिक से अधिक दीये जलाएं, ताकि लोकल फार वोकल के तहत कुम्हारों के मिट्टी के दीए बिके। पटाखे जलाने से पर्यावरण और दुर्घटना का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में दीए जलाएं।- मृदुला जायसवाल, महापौर
कोरोना संक्रमण का संकट टला नहीं है। ऐसे में तेज आवाज वाले पटाखों को जलाने से बचना होगा। यह खुद के साथ दूसरों की सेहत के लिए भी खतरनाक है। बीएचयू एनएसएस की ओर से भी इसकी अपील की जाती है। -डॉ. बाला लखेन्द्र, समन्वयक, एनएसएस बीएचयू
बड़ों को चाहिए कि वे बच्चों को तेज आवाज के पटाखें न जलाने दें। इसके लिए बच्चों को प्रेरित करें कि रोशनी के पर्व में बस अनार और फुलझड़ी जलाएं। कोरोना काल भी चल रहा है, ऐसे में इस बार सतर्कता और भी जरूरी है। - प्रो. ओपी राय, चीफ प्रॉक्टर, बीएचयू
घर को दीयों की रोशनी से सजाएं। पटाखों का शोर और धुआं वायु और ध्वनि प्रदूषण का कारण है। जनता से अपील है कि वह घरों को दीयों से सजाएं। पटाखों से दूरी खुद और समाज के साथ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जरूरी है। - पं. छन्नू लाल मिश्र, पद्मविभूषण
इस बार अधिक से अधिक दीए जलाएं, ताकि लोकल फार वोकल के तहत कुम्हारों के मिट्टी के दीये बिकें। पटाखे जलाने से पर्यावरण खराब होता है। कोरोना काल में पटाखे दमा के रोगियों और पर्यावरण के लिए भी खतरनाक साबित होंगे। - मृदुला जायसवाल, महापौर
बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच पटाखों का धुआं और धमाका आदमी के साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी नुकसानदायक है। इस कोरोना काल में देश के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हुए मिट्टी के दीये जलाएं। - अमित पाठक, एसएसपी
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