वाराणसी। ब्रह्मांड की उत्पत्ति 33,342 तत्वों से हुई है। 60 परमाणुओं के मेल से एक अणु की उत्पत्ति होती है। आकाश किसी भी परमाणु के मेल से नहीं बना है। यह ब्रह्मांड परमेश्वर की संपूर्ण शक्ति का चतुर्थांश है। ईश्वर का ज्ञान अनादि है, वह कभी बदलता नहीं है, नष्ट नहीं होता है। उक्त विचार दिल्ली से आए आचार्य डॉ. वेद प्रकाश क्षोत्रीय ने व्यक्त किए।
वह शनिवार को महमूरगंज स्थित पाणिनी कन्या महाविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय वेद विज्ञान कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसी सृष्टि आज है वैसी ही पूर्व में भी थी। आने वाले समय में भी यह सृष्टि इसी तरह से होगी। इस दौरान विद्वानों ने आरंभक द्रव्य, सूत्रात्मा वायु, अहंकार, ईश्वर, जीव, प्रकृति पर विचार व्यक्त किए। आर्य वीर दल के उपसंचालक दिनेश आर्य, डॉ. ताराशंकर मिश्र ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत आचार्य नंदिता शास्त्री ने किया। कार्यशाला का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ।