फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की पत्नी का निधन, गाजीपुर में शोक में डूबे लोग

Fri, 02 Aug 2019 08:02 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
विज्ञापन
शहीद अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

सन् 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का पासा पलटने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी का शुक्रवार को निधन हो गया। रसूलन बीबी काफी समय से बीमार चल रही थीं। 

विज्ञापन


भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के नायक, परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी बीमारी के दौरान शुक्रवार की दोपहर अंतिम सांसें लीं। 93 बसंत देख चुकी रसूलन बीबी के निधन की खबर मिलते ही पूरे जनपद में लोग शोक में डूब गए।

पैतृक गांव धामूपुर में उनके अंतिम दर्शन के लिए देर रात तक लोगों को तांता लगा रहा। रसूलन बीबी अभी और जीना चाहती थी, उन्होंने जिंदगी के अंतिम पड़ाव में काफी कुछ करने के लिए सोचा था। वह गांव के विकास के लिए सपने बुनती रहती थी, यह अब भी अधूरे हैं।
विज्ञापन


दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन से सटे धामूपुर गांव में जन्में अब्दुल हमीद को बचपन से सेना में जाने का शौक था। लेकिन दर्जी का काम करने वाले उनके पिता इससे डरते थे। बेटा फौज में भर्ती हो यह वह नहीं चाहते थे। लेकिन अब्दुल हमीद ने जिद्द नहीं छोड़ी और एक दिन घर से बिना बताए वह वाराणसी पहुंच गए और वहां फौज में भर्ती हो गए।

Trending Videos
विज्ञापन

धामूपुर गांव इस तरह आया चर्चा में

धामूपुर गांव उस समय चर्चा में आया जब 10 सितंबर 1965 को पाकिस्तान सेना अमृतसर को घेरकर उसको अपने नियंत्रण में लेने को तैयार थी, अब्दुल हमीद ने पाक सेना को अपने अभेद्य पैटर्न टैंकों के साथ आगे बढ़ते देखा। प्राणों की चिंता किए बिना अब्दुल हमीद ने अपनी तोपयुक्त जीप को टभ्ले के समीप खड़ा किया और गोले बरसाते हुए शत्रु के कई टैंकों को ध्वस्त कर दिया।

इसके बाद पाकिस्तानी सेना के पैर जंग के मैदान से उखड़ गए और वह पीछे लौटने को मजबूर हो गए। वीर अब्दुल हमीद ने अपने साहस और पराक्रम से दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। इस लड़ाई में माटी के लाल ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी। वीर अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

उनकी प्रेरणास्रोत रही पत्नी रसूलन बीबी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश में सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच अपनी विशेष पहचान रखती थी। जनपद में भी अब्दुल हमीद की स्मृतियों को सहेजने में उनके प्रयासों की लोग सराहना करते नहीं थकते हैं।

निधन पर पूरा इलाका ही नहीं जनपद और पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई है। यहां आज भी सुबह-शाम फौज की तैयारी करने वालों की भीड़ देखने को मिलती है। रसूलन बीबी के निधन के बाद शोक संवेदना का क्रम शुरू हो गया है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें