वीरभद्र मित्र बताते हैं, नेताजी साधु बनने की इच्छा लेकर घर से निकले थे और हरिद्वार, ऋषिकेश, अल्मोड़ा होते हुए दूसरी बार बनारस पहुंचे थे। रामकृष्ण मिशन भी गए थे। नित्यानंद राय बताते हैं कि तीसरी बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नेताजी बनारस आए थे। बीएचयू में सभा होनी थी और कैंट स्टेशन से बीएचयू तक जनसैलाब उमड़ा था।
सभास्थल तक पहुंचने में रात्रि के 11:30 बज गए। 1939 में कांग्रेस छोड़ने के बाद जब नेताजी ने पूरे देश में 11 महीने में 900 सभा की थी तो उस समय भी बनारस आए थे। भारत कला भवन में नेताजी से जुड़ी कई यादें संग्रहीत हैं। नेताजी की बहन उर्मिला देवी की शादी गोरखपुर के राय परिवार में हुई थी और उनके बहनोई चिकित्सक थे।