जय गुरुदेव जन जागरण यात्रा में हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने पंकज बाबा को क्लीन चिट दे दी है। राजघाट पुल पर शनिवार की दोपहर भगदड़ के दौरान हुई 25 लोगोें की मौत के मामले में रामनगर थाने में पांच साधारण लोगों को नामजद और प्रबंधकगण का नाम लिए बगैर एफआईआर लिखकर पुलिस ने सीधी कार्रवाई के बजाय बीच का रास्ता निकाला है। कहा जा रहा है कि इसे मामले से जुड़े रसूखदार लोगों को कानूनी पचड़े से बचाने के लिए पुलिस ने ऐसा किया है। जबकि, रविवार को डीजीपी जावीद अहमद ने कहा था कि आयोजकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा लेकिन पंकज बाबा को इन सबसे मुक्त कर दिया गया और इससे लोगों को हैरानी भी नहीं हुई। सोमवार की दोपहर पंकज बाबा सैकड़ों शिष्यों की मौजूदगी में लक्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ जय गुरुदेव आश्रम मथुरा के लिए रवाना हो गए।
काफी माथापच्ची के बाद हादसे के दूसरे दिन रविवार की देर रात रामनगर थाने में थानाध्यक्ष मूलचंद चौरसिया की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमे के अनुसार चेतगंज थाना क्षेत्र के लच्छीपुरा चौकाघाट निवासी जय गुरुदेव संगत के अध्यक्ष बेचू प्रसाद गुप्ता ने 15 अक्तूबर को डोमरी से सेमरा, पड़ाव, राजघाट पुल, प्रहलाद घाट, मछोदरी, मैदागिन, गोदौलिया, रामापुरा चौराहा, लहुराबीर, नाटीइमली, डीएवी कॉलेज, हरतीरथ, गोलगड्डा होते हुए वापस डोमरी तक तीन हजार लोगों की शोभायात्रा की अनुमति मांगी थी। जांच कराकर 23 शर्तों के साथ अनुमति दी गई।
15 अक्तूबर को आवेदक बेचू प्रसाद गुप्ता, स्वागत कमेटी के सदस्य बाबूराम, चरण सिंह व अवधेश मणि त्रिपाठी, सह आयोजक यशवंत प्रसाद चौरसिया और प्रबंधकगण ने प्रशासन को सूचना दिए बगैर पांच लाख की संख्या में लोगों को साजिश के तहत शक्ति प्रदर्शन के लिए कार्यक्रम स्थल पर एकत्रित किया। आयोजकों ने भीड़ में शामिल लोगों से कहा कि यदि जुलूस में सम्मिलित सभी लोग परिक्रमा में नहीं जाएंगे तो पाप के भागी होंगे। इस तरह से लोगों को उकसाकर एक साथ चलने के लिए उद्वेलित किया गया। इस कारण राजघाट पुल पर एकाएक बड़ी तादाद में भीड़ एकत्र हो गई और अफरातफरी का माहौल पैदा होने से भगदड़ मच गई।