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स्मृति शेष: संकटमोचन के महंत के गुरु थे पं. छन्नूलाल मिश्र, मंदिर परिसर में दी थी 40 से ज्यादा प्रस्तुतियां

Sat, 04 Oct 2025 04:38 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

पंडित छन्नूलाल मिश्र के गायकी के दीवाने संकटमोचन मंदिर के पूर्व महंत प्रो. वीरभद्र भी थे। उन्होंने उन्हें अपना गुरु बनाया था। हनुमत दरबार में गायकी के उस्ताद ने 40 से ज्यादा प्रस्तुतियां दी थीं।
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संकटमोचन के महंत के गुरु थे पं. छन्नूलाल मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
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Chhannulal Mishra Death: पंडित छन्नूलाल जी का जीवन संकटमोचन मंदिर और वहां की परंपराओं से गहराई से जुड़ा रहा। वे वर्षों तक संकटमोचन संगीत समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे। उनके जीवन की एक विशेष कथा यह रही कि महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र (पूर्व महंत, संकटमोचन मंदिर, गंगा–योद्धा और समाज सुधारक) उनसे गहराई से जुड़े रहे। 

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उन्होंने पंडित जी को अपना गुरु माना। जीवन के लंबे काल तक सप्ताह में दो बार पंडित जी संकटमोचन मंदिर में जाकर महंत जी को स्वर–साधना सिखाते थे। पंडित छन्नूलाल मिश्र ने संकट मोचन संगीत समारोह में 40 साल से ज्यादा समय से प्रस्तुति दे रहे थे। 

पंडित छन्नूलाल के बेटे पंडित रामकुमार ने बताया कि संकटमोचन संगीत समारोह से पिता का लगाव था। पिता के साथ 1975 से ही संगत कर रहा हूं। इस बार पिता बीमार थे इसलिए उनकी प्रस्तुति नहीं हो पाई थी लेकिन मेरी और उनके पोते राहुल मिश्र की प्रस्तुति हुई थी।

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इन लोगों ने दी श्रद्धांजलि

पं. छन्नूलाल मिश्र एक संघर्षशील कलाकार थे। आजमगढ़ के हरिहरपुर ग्राम से निकलकर उन्होंने तृणमूल से लेकर शिखर तक की यात्रा की। मेरा बहुत लंबा समय इनके साथ रहा। एक बहुत अच्छे और लोकप्रिय प्रस्तुतिकर्ता चले गए। एक न एक दिन सबको जाना पड़ता है लेकिन कुछ कलाकारों का चला जाना एक शून्य उपस्थित करता है। - पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य 

प्रसिद्ध गायक, पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र जी हमारे बीच नहीं रहे। उनका जाना बनारस की गायकी और भारतीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। जिस स्थान को उन्होंने अपनी कला से भरा, उस रिक्त स्थान को भर पाना असंभव है। उनकी स्मृतियां बहुत हैं। जब मुझे पद्मश्री मिला था, तब वे स्वयं मिर्जापुर से वाराणसी आए और कहा मेरे छोटे भाई को पद्मश्री मिला है, मैं कैसे न आऊं। पद्मविभूषण जैसे महान सम्मान को पाने के बाद भी वे सरल बने रहे। - पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र, सितार वादक

महाराज जी शास्त्रीय संगीत के एक महान साधक थे। उनके जाने से देश के साथ काशी की संगीत परंपरा को नुकसान हुआ है। 2014 में महाराज जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक रहे। उनके निधन अपूरणीय क्षति है। - अशोक कुमार तिवारी, मेयर

मुझे छन्नूलाल मिश्र जी की सहजता और संगीत प्रेम का अद्भुत अनुभव अस्सी घाट पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हुआ। उस दिन मेरा सितार वादन का कार्यक्रम था। कार्यक्रम समाप्त होने पर पंडित जी सामने बैठे थे। लोगों के आग्रह पर वे मंच पर आए और बोले मेरे भतीजे देवब्रत ने इतना मधुर सितार बजाया है कि अब मेरा मन ठुमरी गाने को है फिर उन्होंने मुझे साथ में बैठाया। - पंडित देवब्रत मिश्र, सितार वादक

वाराणसी ने अपना अनमोल रत्न खो दिया है और मैंने अपना बड़ा भाई। बड़े भाई पंडित छन्नूलाल मिश्र का जाना काशी और बनारस घराने की अपूरणीय क्षति है। बाबा विश्वनाथ उनकी पुण्य आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें। उनका जन्म भले ही आजमगढ़ के हरिहरपुर में हुआ हो, लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि के रूप में बनारस को चुना। - पंडित विकास महाराज, सरोद वादक

संगीत के महानायक के निधन से अपूरणीय क्षति : अजय राय
वाराणसी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पं. छन्नूलाल मिश्र के आवास पर पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के महानायक, बनारस घराने की आत्मा और काशी की पहचान पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन न सिर्फ काशी बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके आवास पर जाकर पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मन बेहद व्यथित हुआ। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि छन्नूलाल जी में बनारसीपन रग-रग में बसता था। 

बनारसी परंपरा के सुर साधक पंडित छन्नूलाल मिश्र का जाना हमारे लिए व्यक्तिगत क्षति है। उनका पुत्रवत स्नेह मिलता था। बनारस की संगीत परंपरा का यह खालीपन सदैव कचोटता रहेगा। ईश्वर ने हमसे, हमारे प्रिय को छीन लिया। वह हमें अपना चेला कह बुलाते थे। मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि है। - धर्मेन्द्र राय, एमएलसी, भाजपा
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पुलिस आयुक्त ने दी श्रद्धांजलि
पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल के आवास पर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, पूर्व मेयर रामगोपाल मोहले, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, विधायक सुशील सिंह, पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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