बनारस याद आता है? क्या-कुछ याद आता है- हमारा पूजा करना याद आता है। छोटी गैबी में रहते थे। जो कहने के लिए छोटी गैबी है लेकिन है बड़ी गैबी। काशी को जब याद करते हैं तो कौन सा गाना याद आता है - बहुत दिन हो गया। लेकिन शिष्यों को सिखाते थे। सब फरमाइश करते थे, गुरुजी सुनाइए। खेले मसाने में होरी।
हमें भी सुना दीजिए गुरुजी - खाने का और गाने का मन नहीं कर रहा है। उनका केयरटेकर गाने के लिए मना करता है, टोकते हुए कहता है - डॉक्टरवा मना किए हैं अभी बोलने, गाने को। पर पंडित छन्नूलाल कहा रुकनेवाले थे। वो गाने लगते हैं। चार अधूरी लाइनें गाए ही थे कि शब्द बिसरने लगते हैं। कहते हैं - शब्दवा भूल जात हैं।
फिर कहते हैं - काशी में प्रोग्राम करेंगे। स्वास्थ्य ठीक रहा तो काशी के घाट पर करेंगे। हमने पूछा - मसाने में होरी सुनाएंगे, तो बोले - वो हमीं ने बनाया है। फिर वो गाने लगते हैं- चिताभस्म भरी झोरी, दिगंबर खेलें मसाने में होरी। आखर आखर गाना समझाते भी हैं, होली में कौन कौन था, गोपन गोपी, श्यामन राधा। फिर कुछ देर टकटकी लगाए कमरे की छत को देखते हैं और फिर आराम करने लगते हैं।