वाराणसी में पंचक्रोशी यात्रा इस बार दुश्वारियों से भरी होगी। यात्रियों को संकल्प से लेकर विसर्जन तक हर पड़ाव पर परेशानियां झेलनी होंगी। मणिकर्णिका से शुरू होकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में पूर्ण होने वाली यात्रा की दूरी भी इस बार एक किलोमीटर ज्यादा हो जाएगी।
श्रद्धालुओं को 84 की जगह अब 85 किलोमीटर की यात्रा तय करनी होगी। उधर, कोरोना संक्रमण के कारण यात्रा को लेकर प्रशासन की तरफ से दिशा निर्देश भी जारी नहीं हुए हैं।
अधिमास में 18 सितंबर से शुरू होने वाली पंचक्रोशी यात्रा के पांचों पड़ावों पर दुश्वारियों का अंबार है। मणिकर्णिका तीर्थ पर संकल्प लेने वाले स्थान पर गंगा में बाढ़ के कारण सिल्ट और गंदगी जमा है। नौका संचालन बंद होने से तीर्थयात्रियों को पैदल ही अस्सी तक जाना होगा।
मणिकर्णिका से अस्सी तक गंगा घाट किनारे से होकर जाने वाला रास्ता बाढ़ के कारण बंद है। कई घाटों का संपर्क टूटने के कारण यात्रियों को सड़क मार्ग से होकर जाना पड़ेगा। संचालक उमाशंकर ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर में जाने वाला प्राचीन मार्ग सरस्वती फाटक का रास्ता धाम के निर्माण के कारण बंद हो गया है। लिहाजा श्रद्धालुओं को नए मार्ग गेट नंबर चार से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करना होगा। यहां से दशाश्वमेध या फिर गोदौलिया होते हुए अस्सी घाट की तरफ पंचक्रोशी मार्ग पर जाना होगा।
धर्मशालाओं की स्थिति है खराब
परिक्रमा के पड़ावों पर धर्मशालाओं की स्थिति खराब है। धर्मशालाओं में गंदगी का अंबार है। अभी तक कर्दमेश्वर से लेकर कपिलधारा तक की धर्मशालाएं साफ नहीं हुई हैं। कई जगह धर्मशालाओं के अवैध कब्जे नहीं हटाए गए हैं। कुछ धर्मशालाएं क्षतिग्रस्त हैं। तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने की कोई व्यवस्था अब तक नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से अभी तक पंचक्रोशी पथ का दौरा भी नहीं किया गया है।
मणिकर्णिका कुंड से आरंभ होती है यात्रा
काशी की प्रमुख यात्राओं का संचालन करने वाले उमाशंकर के अनुसार, पंचक्रोशी यात्रा का आरंभ मणिकर्णिका कुंड से होता है। कहा जाता है कि यह कुंड गंगा से भी प्राचीन है। परिक्रमा पर जाने से पहले भक्त इस कुंड से अंजुली में पानी लेकर यात्रा पूरी करने का संकल्प लेते हैं। इसके बाद गंगा के दक्षिणी क्षेत्र की ओर से प्रस्थान करते हैं।
यहीं से यात्रा का वास्तविक आरंभ होता है। पांच पड़ावों से गुजरते हुए 84 किलोमीटर की यात्रा की जाती है। पांच मंदिर इस यात्रा के महत्वपूर्ण स्थल हैं। पहला पड़ाव कर्दमेश्वर, दूसरा पड़ाव भीम चंडी, तीसरा पड़ाव रामेश्वर, चौथा पड़ाव शिवपुर और पांचवां पड़ाव कपिलधारा है। कपिलधारा से वापस मणिकर्णिका आना होता है और श्रद्धालु यहां पर यात्रा का विसर्जन करके बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं।