कोरोना काल में पंचायत ड्यूटी में तैनात कई शिक्षकों की मौत हो चुकी है। कुछ ऐसे परिवारों पर भी दुखों का पहाड़ टूटा है, जहां कमाने वाले एकलौता शख्स ही अब इस दुनिया में नहीं है। ऐसे परिवार के सदस्य पुरानी जमा पूंजी से फिलहाल काम चला रहे हैं, लेकिन उन्हें जल्द नौकरी या आर्थिक मदद नहीं मिली तो परिवार के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
समय से डॉक्टरों ने देखा होता तो बच जाती पति की जान
बीएसए कार्यालय में आशुलिपिक पद पर कार्यरत गिरीश चंद्र श्रीवास्तव के हंसते खेलते परिवार की खुशियां कोरोना ने छीन ली। इंदु कहती हैं जिस विभाग की ड्यूटी निभाते निभाते पति ने अपनी जान गंवा दी। उस विभाग का न तो कोई अधिकारी और न कोई सहयोगी अब तक सांत्वना देने पहुंचा। पंचायत चुनाव में प्रशिक्षण के दौरान संक्रमित पति को बुखार आने के बाद बीएचयू में भर्ती कराया गया था। गिरीश बीमार होने के बाद खाना पीना छोड़ चुके थे, सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से वह हाफ रहे थे। 29 अप्रैल अस्पताल पहुंचकर देखा तो उनका ऑक्सीजन मास्क निकला हुआ था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। समय से डॉक्टर ने उन्हें देखा होता तो मेरे बच्चों के सिर से पिता का साया न उठता।
वर्जन
विभाग की ओर से मृतक आश्रित के तहत नौकरी के लिए फोन आया था। मैं एमएससी बीएड क्वालीफाई हूं, लेकिन अभी छोटे बेटे को देखभाल की जरूरत है। ऐसे में 12वीं में पढ़ने वाले बडे़ बेटे आदित्य की नौकरी के लिए अप्लाई किया है। आवेदन स्वीकार होने की सूचना विभाग ने दी है।
- इंदु श्रीवास्तव, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव की पत्नी
6 महीने पहले ही बने थे शिक्षक
चोलापुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हरदासीपुर में सहायक अध्यापक आनंद पटेल छह महीने पहले ही शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने थे। पत्नी सुनीता, दोनों बेटियों व बेटे मयंक का रो रोकर बुरा हाल है। रणसीपुर निवासी आनंद पंचायत चुनाव के लिए यूपी कॉलेज में हुई ट्रेनिंग के दौरान संक्रमित हुए। खांसी व सांस लेने में दिक्कत बढ़ने के बाद उन्हें बीएचयू ले जाया गया, लेकिन बेड न मिलने पर बाईपास पर किसी अस्पताल में भर्ती कराया। आनंद ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, लेकिन वेंटिलेटर न मिलने के कारण उनकी 18 अप्रैल को मृत्यु हो गई। सुनीता को अभी से बेटियों की पढ़ाई और शादी की चिंता सताने लगी है। बड़ी बेटी आंचल इंटर में है और वह नीट की तैयारी कर रही है। छोटी बेटी कक्षा 11 व बेटा कक्षा 9 में पढ़ाई कर रहा है। आनंद पटेल अखिलेश सरकार में शिक्षा मित्र थे। बाद में शिक्षामित्रों की नियुक्ति को सरकार ने रद्द कर दिया था। फिर आनंद ने टीईटी पास किया और सहायक अध्यापक बने। लेकिन चार महीने से वेतन रुका हुआ था। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष शशांक कुमार पांडेय ने बीएसए से वार्ता कर वेतन रिलीज कराया था।
मेरी योग्यता इंटर पास है, मृतक आश्रित के तहत मैंने चतुर्थ श्रेणी में अप्लाई किया है। विभाग की ओर से आवेदन स्वीकार्य कर लिया गया है। आगे की कोई सूचना तो बेसिक शिक्षा कार्यालय से नहीं मिली है।
- सुनीता पटेल, आनंद पटेल की पत्नी