प्रो. श्रवण कुमार ने बताया कि पाकिस्तान से आए वॉयस संदेश के बाद जब मैंने रिजवान खान से बात की तो उन्होंने बीज उपलब्ध कराने की बड़ी गुजारिश की। मैंने उन्हें ये बता दिया है कि मैं बीज सीधे उपलब्ध नहीं करा सकता। हां, अगर उन्हें फिर भी ये बीज चाहिए तो शोध में सहयोगी रहे अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) से मदद ले सकते हैं। इरी पूरे विश्व के लिए शोध करता है। इसके केंद्र पाकिस्तान में भी हैं।