कहा कि मन हमेशा चिंतित रहता है कि उन सात दिनों में मेरी बेटी के साथ क्या हुआ होगा। परिजनों को न मिलने दिया और न सीसीटीवी में दिखाया कि वो कैसी है। सात दिन तक इलाज हुआ कुछ देर पहले कहा कि स्थिति में सुधार हो रहा है और दो घंटे बाद कहा कि मौत हो गई, ले जाइए बेटी को। मेरी विनती है कि हमें उन सात दिनों का सीसीटीवी फुटेज दिलाई जाए कि किस हाल में मेरी बेटी को वहां रखा गया और कैसा इलाज मिला।
पंडित छन्नूलाल ने बताया कि कमिश्नर और जिलाधिकारी से बात हुई तो उन्होंने कहा कि जांच चल रही है आप परेशान न हों। कोरोना की वजह से देर हो रही है। जो डॉक्टर्स जांच कर रहे हैं वो आ नहीं रहे हैं जल्दी ही सब होगा पर 20 दिन गुजर गए।
छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्रा ने मेडविन अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि हो सकता है वह सीसीटीवी फुटेज ही डिलीट कर दें। वह कह रहे हैं कि उनका सीसीटीवी दो महीने से खराब है, वो झूठ बोल रहे हैं। जिस दिन मेरी दीदी एडमिट हुई थी उस दिन उनका सीसीटीवी कैमरा चल रहा था। मेरी दीदी आराम से बेड पर लेटी दिखीं और उस सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर है मेरे पास।
हमें शासन और प्रशासन पर भरोसा है, लेकिन 20 दिन में सात दिन की सीसीटीवी फुटेज नहीं निकाल पाए ये लोग। हमारी मांग है कि बहन को इन सात दिनों में क्या दवाइयां दी गईं। कौन से इंजेक्शन लगाए गए और साथ ही क्या टेस्ट हुए इसकी कोई डिटेल नहीं दी गई है।
पं. मिश्र ने बताया कि कि बेटी संगीता मिश्रा की मेडविन अस्पताल में संक्रमण से मौत हुई थी। उनकी छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्रा ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली थाने में तहरीर दी थी। वहीं जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी नियुक्त करते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात कही थी। 20 दिन बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।