लहरी को चोट लगने के फोटो, वीडियो उपलब्ध कराए गए थे। इसके बाद परिजनों ने ईमेल के जरिये बीएचयू के कुलपति, आईएमएस बीएचयू के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक से शिकायत की थी। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई की चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि प्रो लहरी की मेडिकल जांच कराई जानी चाहिए। इससे अंदरूनी चोट लगने के तथ्य सामने आ सकेंगे।
जिस डिपार्टमेंट की सेवा में प्रो लहरी ने पूरा जीवन लगा दिया अब उसी के एसोसिएट प्रोफेसर उन्हें पीट रहे हैं। इससे लहरी के स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। इस सिलसिले में डॉ. अरविंद पांडेय का पक्ष लेने का प्रयास किया गया। उन्हें फोन और मेसेज किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब बीएचयू प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है।
ई मेल के जरिये परिजनों की शिकायत मिली है। आईएमएस निदेशक के साथ वार्ड में जाकर प्रो टीके लहरी को देखा है। मामले में मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। बोर्ड के सदस्य शनिवार को आईसीयू में गए हैं। छानबीन की है। मामले की रिपोर्ट जल्द मिलेगी। पिटाई के आरोप प्रथम दृष्टया सही नहीं लग रहे हैं। डाॅ अरविंद ही प्रो लहरी की लगातार सेवा कर रहे हैं। - प्रो पुनीत कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, बीएचयू अस्पताल
बीएचयू प्रशासन से नहीं मिली सूचना
प्रो लहरी के परिवार के सदस्य कोलकाता में रहते हैं। सदस्यों के मुताबिक, प्रो टीके लहरी को थप्पड़ मारने, दुर्व्यवहार आदि की जानकारी विभाग के डॉक्टर से मिली थी। बीएचयू प्रशासन की तरफ से कोई सूचना नहीं दी गई थी। इसी तरह लहरी की बीमारी की जानकारी भी बीएचयू प्रशासन को नहीं मिल सकी थी। वे 15 दिनों तक अपने ही घर में बिस्तर पर पड़े रहे। अमर उजाला ने मामले को उठाया तो बीएचयू प्रशासन हरकत में आया और उन्हें अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू कराया।
2003 में सेवानिवृत्त फिर भी ओपीडी में देखते रहे मरीज
कोलकाता में 3 जनवरी 1941 को जन्मे डॉ. लहरी आईएमएस बीएचयू से 2003 में सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे लगातार घर से पैदल सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी में जाते और मरीज देखते। एप्रन पहनकर एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में काला बैग लिए डॉक्टर लहरी नरिया गेट से एनसीसी बटालियन वाली लेन, कुलपति आवास के सामने से सुपरस्पेशियिलटी ब्लॉक जाते दिख जाते। फिलहाल आठ महीने से वह आईसीयू में भर्ती हैं। डॉक्टरों की टीम इलाज कर रही है। वर्तमान में आईएमएस बीएचयू में कई प्रोफेसर जो विभागाध्यक्ष सहित अन्य अहम पदों पर बैठे रहें, उन्हें डॉ. लहरी ने पढ़ाया है।
2006 में मिला पद्मश्री, दान कर देते हैं पेंशन का हिस्सा
प्रो टीके लहरी को मरीजों की सेवा, समर्पण के लिए 2006 में पद्मश्री से नवाजा गया। वह अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा संस्थानों को दान देते हैं। किसी की मदद नहीं लेते हैं। अगर कोई मदद का प्रस्ताव देता है तो सिरे से खारिज कर देते हैं।