भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री नीरज कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2015-16 में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में हुई नियुक्तियों में 22 अभ्यर्थियों की नियुक्तियां फर्जी पाए जाने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने और प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। प्रकरण में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश ने आठ जुलाई 2025 को तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। शिकायत के अनुसार, समिति की जांच अब तक पूरी नहीं हुई है।
शिकायत में कहा गया है कि उस समय मनीष कुमार वरिष्ठ सहायक के रूप में संबंधित पटल पर कार्यरत थे। चयन प्रक्रिया से जुड़े मूल आवेदन, संलग्नक, चयन सूचियां और कटऑफ मेरिट से संबंधित कुछ मूल अभिलेख उनके स्तर से चार्ज में उपलब्ध नहीं कराए गए। न्यायालय में लंबित मामलों के लिए आवश्यक मूल अभिलेख उपलब्ध कराने को उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था।
निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर के कार्यकाल से जुड़े प्रकरण में 27 अक्तूबर 2025 को कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज होने का भी उल्लेख है। आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रभावी विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
पत्र में वर्ष 2011 में संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में हुई कथित फर्जी नियुक्तियों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस प्रकरण में मनीष कुमार के खिलाफ पहले भी विभागीय कार्रवाई और निलंबन किया जा चुका है। बाद में बहाली के बाद उसी कार्यालय में उनकी तैनाती पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और प्रभाव का इस्तेमाल कर विभिन्न नियुक्तियों में अनियमितता कराने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने उनकी संपत्ति और कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने की भी मांग की है।
जेडी कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारी मनीष कुमार के खिलाफ शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - मनोज कुमार मिश्रा, एडी बेसिक, आजमगढ़