तीन जनवरी 1941 को कोलकाता में जन्मे डॉ. लहरी बीएचयू से 2003 में सेवानिवृत्त हुए। रिटायरमेंट के बाद भी वे लगातार घर से पैदल सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी में आते हैं। सेवा काल के दौरान हजारों मरीजों के हृदय की सर्जरी कर चुके डॉ. लहरी की खासियत है कि वह सब कुछ भूल सकते हैं, लेकिन ओपीडी जाना नहीं भूलते हैं। एप्रन पहने डॉक्टर लहरी को नरिया गेट से एनसीसी बटालियन वाली लेन, त्रिवेणी गर्ल्स हॉस्टल, एलडी गेस्ट हाउस चौराहा, कुलपति आवास के सामने से एमएस जाते देखा जा सकता है। उनके एक हाथ में काला बैग, दूसरे हाथ में छाता जरूर रहता है।
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आईएमएस में कई प्रोफेसर हैं उनके छात्र, 1996 में पद्मश्री
डॉ. टीके लहरी आज भी अपने पेंशन और अन्य मदों में मिलने वाली धनराशि को मरीजों की बेहतर सेवा के उद्देश्य से अन्य संस्थाओं को दान करते हैं। वर्तमान में आईएमएस बीएचयू में कई प्रोफेसर जो विभागाध्यक्ष सहित अन्य अहम पदों पर बैठे हैं, उनको डॉ. लहरी ने पढ़ाया है। उनकी मरीजों की सेवा, समर्पण को देख 2006 में पद्मश्री से नवाजा गया।
- बीपी 175/107
- एसपीओ 96 प्रतिशत
- पल्स 92
- आरबीएस 124
- पीसीओ2 48.2
क्या बोले आईएमएस बीएचयू के निदेशक
डॉक्टर लहरी के एक करीबी से उनके लंबे समय से बीमार होने की जानकारी मिली। तत्काल चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम एंबुलेंस के साथ भेजकर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए है।
-प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू