धर्म, कला और संस्कृति की नगरी काशी फिर से गौरवांवित हुई है। काशी को मिले तीन पद्मश्री सम्मान ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या को और खुशियों से भर दिया। भारत सरकार ने इस बार काशी की ज्ञान, सेवा और कृषि को पद्मश्री देकर सम्मानित किया है। व्याकरण के उद्भट विद्वान व काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल, समाजसेवी डोमराजा जगदीश चौधरी और किसान चंद्रशेखर सिंह को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। पद्मश्री सम्मान की घोषणा होते ही बधाई देने वालों का तांता लगा रहा है। खास बात यह है कि तीनों नाम प्रशासन की ओर से भेजी गई सूची से अलग हैं। हालांकि अन्य श्रेणी में बनारस से कोई नाम शामिल नहीं है।
खुद को दीन-हीन ना समझें संस्कृत के छात्र
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद प्रो. रामयत्न शुक्ल ने कहा कि यह सम्मान संस्कृत का है। उन्होंने संस्कृत के छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि वह स्वयं को दीन-हीन ना समझें। पारंपरिक शास्त्रों के अध्ययन में निष्ठा के साथ लगे रहें। उन्होंने संस्कृत शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा कि अगर वह निष्ठा के साथ अध्यापन में लगे हुए हैं तो कोई भी सम्मान व पुरस्कार दुर्लभ नहीं है। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधार बनाकर जो परिवर्तन किए गए हैं उससे भारत की शिक्षा का विकास होगा।
सरकार इसको रोजगार से जोड़े और सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में संस्कृत के विभागों की स्थापना हो। काशी विद्वत परिषद के मंत्री पं. दीपक मालवीय, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के सतीश चंद्र मिश्रा, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.टीएन सिंह समेत शहर के विद्वानों ने प्रो. शुक्ल को सम्मान मिलने पर बधाई दी और आशीर्वाद भी लिया। खोजवां के रहने वाले काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रो. रामयत्न शुक्ल व्याकरण के प्रकांड विद्वान हैं। उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति एवं सनातन संस्कृति संवर्धन परिषद की स्थापना करके काशी की परंपरा व संस्कृति के संवर्धन में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रगतिशील किसान के सम्मान से किसान हुए गौरवांवित