असि नदी को पुनजीर्वित करने के लिए यहां किनारे रहने वालों की जमीनों का मालिकाना हक की जांच की जा रही है। इसके दायरे में तकरीबन 500 से अधिक मकान और निर्माण हैं। जिनके जमीनों की जांच के बाद वीडीए की ओर से अवैध निर्माण कराने वालों को नोटिस दिया जाएगा। नदी किनारे 50 मीटर का ग्रीन बेल्ट भी है।
काशी में असि नदी का उद्गम स्थल शहर से ही कुछ दूर स्थित कंदवा को माना जाता है। यह नदी चितईपुर, करौंदी, कर्माजीतपुर, नेवादा, सराय नंदन, नरिया, साकेत नगर, भदैनी और नगवा होते हुए गंगा में जाकर मिलती है। नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए पिछले दिनों एनजीटी ने इस पर गंभीरता से विचार कर तत्काल सारे अतिक्रमण को हटाते हुए उसे अपने वास्तविक स्वरूप में लाने के निर्देश दिए थे।
8 किमी लंबी इस नदी, जिसकी चौड़ाई कभी 200 मीटर से अधिक हुआ करती थी। वह अतिक्रमण की वजह से सिकुड़ते-सिकुड़ते सिर्फ 8 फीट की रह गई है। वरुणा कॉरिडोर के समय 762 लोगों को वीडीए ने अवैध निर्माण का नोटिस दिया था। लेकिन मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। असि नदी के किनारे बड़े-बड़े मकान, अस्पताल, होटल और अपार्टमेंट बने हैं।
अब तक ना अतिक्रमण हटा है और ना ही अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू हुई है। इसकी वजह से अतिक्रमण करने वाले बेखौफ होकर अभी निर्माण करते दिखाई दे रहे हैं। वीडीए के अधिकारियों के अनुसार नदी को अतिक्रमण मुक्त बनाने की कार्रवाई के तहत जांच की जा रही है।
इसके लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। जल्द ही नदी अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई देगी और इसकी विस्तृत रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी।