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खत्म हो चुका है 90 साल का पट्टा

Tue, 20 Sep 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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बनारस क्लब में तो बड़ा अजब-गजब खेल चल रहा है। यह क्लब जिस जमीन पर स्थापित है, वह नजूल की है। इस जमीन की 90 साल के पट्टे की अवधि डेढ़ साल पहले ही खत्म हो गई है। वहीं, इससे पहले पुराने पट्टे का बीते 21 साल से नवीनीकरण भी नहीं कराया गया था। चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि क्लब जिस जमीन पर चल रहा है, उसमें बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण भी कराया गया है। यही कारण रहा कि क्लब की जमीन को फ्री होल्ड करने के आवेदन को सरकार ने निरस्त कर दिया था। क्लब को 1.33 एकड़ नजूल जमीन महज 33.75 रुपये वार्षिक किराये पर मिली है। यदि इसके वर्तमान बाजार मूल्य का आंकलन करें तो यह करोड़ों की होगी। जानकारों का कहना है कि पट्टा समाप्त होने के कारण अगर सरकार चाहे तो क्लब की जमीन पर कब्जा ले सकती है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी ऐसा होने नहीं देंगे।
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बनारस क्लब में आजकल सत्ता संघर्ष और वर्चस्व की लड़ाई चरम पर है। 1416 सदस्यीय इस क्लब के सदस्य दो धड़े में बंटे हुए हैं। एक धड़ा नौकरशाहों के गुट का है तो दूसरा इनका धुर विरोधी है। इस संवाददाता ने सोमवार को क्लब में चल रहे घमासान की तह में जाने का प्रयास किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मसलन यही कि क्लब को मिली जमीन का 90 साल की अवधि का पट्टा आठ अप्रैल, 2015 को खत्म हो चुका है मगर क्लब डेढ़ साल से नया पट्टा नहीं ले पाया और आवंटित जमीन पर ऐसे ही चल रहा है। ‘अमर उजाला’ को जो सबूत मिले हैं, उसके अनुसार क्लब के पुराने पट्टे का 27 जून, 1995 को नवीनीकरण किया जाना था, जो सात अप्रैल, 2015 तक के लिए होता। मगर क्लब के सदस्य पट्टे का नवीनीकरण करा नहीं पाए। हां, यह जरूर हुआ कि जमीन बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी और क्लब के कर्ताधर्ता ने नवीनीकरण का आवेदन निर्धारित अवधि के भीतर कर दिया।


पट्टे के नवीनीकरण की तमाम कोशिशें को सफल न होता देख पूर्व के ‘आला अधिकारी’ के कहने पर क्लब ने इस संभावना के साथ एक व्यक्ति को सदस्यता दे दी कि वह शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी करेगा। नौकरशाहों और क्लब के सदस्यों के बीच यह व्यक्ति ‘सेतु’ का काम करता है। यह सदस्य स्वयं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बड़ा करीबी बताता है। सत्ता शीर्ष में भी इसी करीबी को बताकर रौब झाड़ता है पर यह ‘शस्त्र’ भी काम न आया। बताया जाता है कि क्लब के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल इस विवादित सदस्य की अगुवाई में सीएम अखिलेश यादव से भी मिला था पर सुनवाई नहीं हुई। तभी से क्लब के एक धड़े को विवादित सदस्य फूटी आंख नहीं सुहा रहा है। इस धड़े का मानना है कि रियायती दर और गैर अर्ह होने के बावजूद इसे सदस्यता दी गई लेकिन वह किसी काम का नहीं निकला।
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क्लब की नजूल भूमि को फ्री होल्ड कराने के लिए वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार से अनुरोध किया गया था। इसके लिए 40 लाख रुपया भी जमा किया गया था मगर प्रभारी अधिकारी (नजूल) ने पांच अगस्त, 2010 को क्लब के अनुरोध को निरस्त कर दिया था। उनका कहना था कि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन कर बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के क्लब द्वारा निर्माण कार्य कराया गया है। जांच में पाया गया कि क्लब द्वारा पट्टा की गई जमीन से ज्यादा पर कब्जा किया गया है। इसके साथ क्लब द्वारा 1995 से पट्टे का नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसलिए नजूल भूमि को क्लब के पक्ष में फ्री होल्ड किया जाना उचित नहीं है।


बनारस क्लब के वार्षिक चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, घमासान बढ़ता ही जा रहा है। तेजी से बदले घटनाक्त्रस्म में सोमवार की रात डॉ. एनपी सिंह को बनारस क्लब की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। साथ ही उनके कार्यकाल के दौरान साढ़े तीन लाख रुपये के गबन की बात सामने आई है। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण के आदेश से इसकी जांच सीओ चेतगंज एएसपी अनुराग आर्य को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. सिंह की सदस्यता सहित अन्य मसलों पर निर्णय लिया जाएगा क्लब में सोमवार की रात कमिश्नर की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें डीएम विजय किरन आनंद, क्लब के सचिव कुमार अग्रवाल और कार्यसमिति के छह सदस्य मौजूद थे। डीएम ने बताया कि बनारस क्लब विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने, क्लब के खिलाफ  पर्चे बंटवाने और व्हाट्सएप पर एसएमएस वायरल करने सहित अन्य आरोपों में पूर्व सचिव डॉ. एनपी सिंह की सदस्यता को निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
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