बनारस शहर में दौड़ने वाले ओवरलोड वाहनों से टूट रहीं सड़कें गड्ढों में तब्दील हो रही हैं। जर्जर सड़कों से आवागमन में मुश्किलें हो रही हैं। सुविधाशुल्क के चक्कर में जिम्मेदारों ने आखें बंद कर ली हैं। ट्रैफिक व्यवस्था का भी कचूमर निकल रहा है।
नो इंट्री में दौड़ते ओवरलोड वाहनों की जिम्मेदारी से संबंधित महकमे पल्ला झाड़ने में लगे हैं। जबकि, लोक निर्माण विभाग का दावा है कि शहर की 21 टन क्षमता वाली सड़कों से 70 टन तक के मालवाहक धड़ल्ले से गुजारे जा रहे हैं। इसके चलते सड़कों के टूटने-धंसने से जगह-जगह गड्ढे हो रहे हैं।
हालांकि संभागीय परिवहन महकमे का दावा है कि शहर में जो भी मालवाहक प्रवेश करते हैं, वे अंडरलोड होते हैं। सड़कों की गुणवत्ता ठीक न होने से उनके धंसने-टूटने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उधर, सिविल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपे जाने के मामले में एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज का कहना है कि नो इंट्री का पालन सुनिश्चित कराने की ताकीद की गई है। यदि कहीं शिथिलता बरती जा रही है तो संबंधितों को बख्शा नहीं जाएगा।
जानकारों का दावा है कि शहर में प्रतिदिन प्रवेश करने वाले करीब पांच हजार वाहनों में से दो हजार वाहनों को लहरतारा, मंडुवाडीह और महमूरगंज होते हुए गुजारा जा रहा है।
लगभग 36 करोड़ की लागत से बनकर तैयार इस 800 मीटर के आरओबी की डिजाइन आईआरसी क्लास ए की है। जिससे छोटे और मध्यम भार वर्ग वाले वाहनों को ही निकाला जा सकता है। आवश्यक होने पर अनुमति के आधार पर बडे़ वाहन गुजर सकते हैं।
लेकिन इस पुल से प्रतिदिन गुजरने वाले आठ हजार छोटे बड़े वाहनों में से डेढ़ हजार तो ओवर लोड ट्रक हैं, जो प्रतिबंध के बावजूद इस मार्ग से धड़ल्ले से पार कराए जा रहे हैं। मंडुवाडीह और महमूरगंज बाजार की सड़कें भी कम क्षमता की है। ओवरलोड वाहनों के दौड़ने से ये सड़कें जगह-जगह धंस गई हैं।