कार्यक्रम में प्रो विशिष्ठ त्रिपाठी, डॉ नागराज पातुरी, प्रो रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो रामपूजन पांडेय, कृष्ण जोशी, भूटान के राजगुरू स्वामी विवेकानन्द सरस्वती, ब्रम्हश्री मणि शास्त्री द्रविण, हरिराम भट्ट, डॉ पवन शुक्ला, ज्ञानेन्द्र सापकोटा आदि लोग उपस्थित रहे।
अवच्छेदक और अवच्छिन्न शब्दों से गूंजा संपूर्णानंद :
शास्त्रार्थ के दौरान अवच्छेदक और अवच्छिन्न शब्दों का सबसे अधिक प्रयोग दिखा। शास्त्रार्थ परंपरा में माना गया है कि एक शब्द से जोड़ना और एक से अलग करना होता है। ऐसे में इन दोनों शब्दों का शास्त्रार्थ में सबसे अधिक बार सुनने को मिला। विद्वानों ने इन दोनों शब्दों को शास्त्रार्थ की रीढ़ बताई।