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Gyanvapi: रडार तकनीक से ज्ञानवापी परिसर के सर्वेक्षण की मांग पर आदेश है सुरक्षित, 1991 में हुआ था मुकदमा

Sat, 13 May 2023 03:13 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंगनुमा आकृति शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और साइंटिफिक सर्वे के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग पर कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है।
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ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी मामले में वर्ष 1991 का एक मुकदमा है। इसमें विवादित स्थल का रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है। फिलहाल इस मुकदमे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

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वर्ष 1991 में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ व अन्य बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी व अन्य का वाद दाखिल किया गया था। लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने 10 दिसंबर 2019 को जिला अदालत में प्रार्थना पत्र देकर ज्ञानवापी परिसर के विवादित स्थल का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से रडार तकनीक से सर्वेक्षण कराने की अपील की थी।

मसाजिद कमेटी ने हाईकोर्ट में की थी अपील

08 अप्रैल 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने विजय शंकर रस्तोगी के आवेदन को स्वीकार कर सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की अपील पर सितंबर 2021 में हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के विवादित स्थल के रडार तकनीक से सर्वेक्षण पर रोक लगा दी थी।
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22 मई को जिला जज तय करेंगे कैसे हो सर्वे

हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है। - फोटो : अमर उजाला
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से अब 22 मई को वाराणसी के जिला जज तय करेंगे कि इस मामले में आगे कैसे बढ़ना है। जिला जज तय करेंगे कि शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और साइंटिफिक सर्वे कैसे व कब हो। एएसआई ने हाईकोर्ट को बताया है कि शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए बगैर उसकी उम्र, लंबाई, चौड़ाई और गहराई बताई जा सकती है।
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यह हिंदू पक्ष की जीत

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि  सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच की मांग पर फैसला आया है। यह हिन्दू पक्ष की जीत है। इस जांच से 350 वर्ष पुराना विवाद समाप्त हो जाएगा। हाईकोर्ट का फैसला मील का पत्थर साबित होगा। अगर, यह 500 वर्ष पुराना पाया गया तो मस्जिद की थ्योरी समाप्त हो जाएगी। क्योंकि मस्जिद की थ्योरी 350 साल पुरानी है।

ज्ञानवापी से संबंधित प्रकरण कैसे आगे बढ़ा

  • 18 अप्रैल 2021: ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग के लिए सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दाखिल।
  • 09 अप्रैल 2022: अदालत ने अजय कुमार मिश्र को अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त कर कमीशन की कार्रवाई के आदेश दिए।
  • 06 मई 2022: ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के लिए टीम पहुंची, लेकिन विरोध और बैरिकेडिंग के चलते लौटना पडना।
  • 12 मई 2022: न्यायालय ने सर्वे की कार्रवाई जारी रखने के आदेश के साथ ही विशाल सिंह को विशेष अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त कर दिया।
  • 16 मई 2022: हिंदू पक्ष ने कथित शिवलिंग मिलने का दावा किया और हिन्दू पक्ष के वकील हरीशंकर जैन के आवेदन पर अदालत ने कथित शिवलिंग वाली जगह को सील करने का आदेश दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
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  • 17 अप्रैल 2023: मुस्लिम पक्ष ने नमाज में आ रही समस्या पर सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था। इस पर को सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी जिलाधिकारी को समस्या के समाधान का आदेश दिया था। ईद से पहले ज्ञानवापी परिसर के 100 मीटर के दायरे में सचल शौचालय और वजू के लिए पानी से भरे टब की व्यवस्था की गई थी।
  • 12 मई 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइंटिफिक सर्वे और कार्बन डेटिंग का आदेश दिया।
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