दोनों विभागों की ओर से नाविक पोर्टल शुरू कर नाविकों को अपनी नावों का पंजीकरण कराने को कहा गया है। पोर्टल पर प्राथमिक पंजीकरण के बाद आरटीओ की ओर से नियुक्त सर्वेयर नाव का सर्वे करेगा। इस दौरान सभी मानकों के अनुरूप नाव की जांच की जाएगी। सर्वे में सफल होने पर सर्वेयर रेडी टू मूव का प्रमाणपत्र देगा। इसके बाद आरटीओ की ओर से नाव को पंजीकरण संख्या उपलब्ध कराई जाएगी। सर्वे में असफल होने पर नाव का आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा और उसका संचालन नहीं किया जा सकेगा।
चार मुख्य मानकों पर होगा सर्वे
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार सर्वे में मुख्य रूप से चार मानकों की जांच की जाएगी। इसमें नाव किस सामग्री की बनी है, उसकी बैठने की क्षमता कितनी है, उसमें किस प्रकार का ईंधन इस्तेमाल किया जाता है तथा सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच की जाएगी।
सिर्फ 1217 नावों का है पंजीकरण, चल रहीं 3000 से अधिक
गंगा में वर्तमान में 3000 से अधिक छोटी-बड़ी नावों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से केवल 1217 नावों का ही पंजीकरण है, जो वर्ष 2023 तक नगर निगम की ओर से किया गया था। इसके बाद किसी भी नाव का पंजीकरण नहीं हुआ। वर्ष 2026 में अब यह प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है।
अधिकारी बोले
नाविक पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नाविकों को इसके बारे में जानकारी भी दी गई है। सर्वे में मानक पूरा करने वाली नावों को ही पंजीकरण संख्या दी जाएगी। -मनोज प्रसाद वर्मा, एआरटीओ प्रशासन