मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बागडोर संभालने के साथ ही एलान किया था कि अपराधियों की जगह अब सिर्फ जेल होगी। मगर, बनारस की पुलिस के लिए एक अरसे से चुनौती बने 39 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी बीते एक साल में नहीं की जा सकी। इन अपराधियों में से एक हजार से लेकर दो लाख तक के इनामी बदमाश शामिल हैं।
वहीं, महिलाओं के प्रति अपराध में भी कमी नहीं आई है और चोरों ने जिले के लोगों की नींद उड़ा रखी है। इस बीच आमजन के लिए सुकून वाली यह बात जरूर रही कि हत्या, रंगदारी और फिरौती मांगने जैसी वारदातों में कमी आई है।
वर्ष 2018 में एक जनवरी से अब तक हत्या के सात, लूट के चार, चोरी के 166, दुराचार के 13, छेड़खानी के 26, किशोरियों के अपहरण के 61, दहेज मृत्यु के आठ, चेन स्नेचिंग के 10 और बलवा के आठ मामले जिले के थानों में दर्ज किए गए।
इससे पहले वर्ष 2017 में हत्या के 48, डकैती के दो, लूट के 46, चोरी के 868, दुराचार के 92, छेड़खानी के 366, किशोरियों के अपहरण के 340, दहेज मृत्यु के 18, चेन स्नेचिंग के 38 और बलवा के 122 मामले दर्ज किए गए थे।
पुलिस के अनुसार एक जनवरी से 28 फरवरी 2018 तक भारतीय दंड संहिता के तहत 1358 मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में वर्ष 2017 में 1428 मामले दर्ज किए गए थे। इसके साथ ही बीते एक साल में बदमाशों और पुलिस के बीच लंका क्षेत्र में एक मुठभेड़ हुई जिसमें दो इनामी बदमाश गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।
इस संबंध में एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि पुलिसिंग को बेहतर बनाने का निरंतर प्रयास जारी है। पूरा प्रयास है कि आमजन के बीच पुलिस की छवि जनमित्र जैसी हो और आपराधिक घटनाओं में कमी आए।