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Varanasi News: इतिहास की किताबों में एकतरफा जानकारी से छात्रों में बढ़ रही बंटवारे की प्रवृत्ति

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वाराणसी में बीएचयू और डीयू के प्रोफेसर्स की एक कार्यशाला में बीएचयू की इमिरेट्स प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री की निदेशक अरुणा सिन्हा ने कहा कि एकतरफा या गलत जानकारी परोसने से छात्रों में बंटवारे की प्रवृत्तियां जन्म ले रहीं हैं। ये भी अंदेशा जताया कि वास्तविक ऐतिहासिक संदर्भों के गुम होने का खतरा बढ़ गया है।
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इतिहास और इतिहास लेखन विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला में उन्होंने कहा कि इतिहास की पाठ्य-पुस्तकों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखते हुए तथ्यों, प्रमाणों और बहु-दृष्टिकोणों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए। बदलावों से इतिहास का एक ऐसा संस्करण पेश किया जा रहा है जो एकतरफा है और देश की बहुसांस्कृतिक विरासत की अनदेखी करता है।

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सत्ता परिवर्तन के साथ ही बदलते हैं इतिहास के कोर्स
मुख्य वक्ता डीयू के डॉ. प्रतीक कुमार ने कहा कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इतिहास के कोर्स में बदलाव देखे गए हैं। जहां एक पक्ष इसे तथ्यों का शुद्धिकरण कहता है। वहीं, दूसरा पक्ष इसे इतिहास का भगवाकरण या वैचारिक संकीर्णता का नाम देता है। स्वतंत्रता के बाद से ही भारत में शिक्षा और खासकर इतिहास की पाठ्यपुस्तकों का स्वरूप केवल शैक्षणिक विषय न रहकर वैचारिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र रहा है। आजादी के बाद भारतीय इतिहास लेखन में आर सी मजूमदार का योगदान बेहतर था। इतिहास लेखन केवल घटनाओं का वर्णन नहीं, बल्कि उनके संदर्भ, कारण और प्रभाव की गहन पड़ताल भी है। डॉ. प्रतीक कुमार ने कहा कि राजनीतिक प्रभाव और कुछ निहित महत्वाकांक्षाओं के कारण किताबों के निर्धारण में भ्रामक तथ्यों को प्रमुखता दे दी गई।
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