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वाराणसी में 1.10 करोड़ की ठगी: छह दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, बेटे को गिरफ्तार करने की दी थी धमकी; जानें मामला

Fri, 23 May 2025 05:03 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

मुंबई पुलिस तो कभी सीबीआई आफिसर बनकर शातिर बदमाशों ने बुजुर्ग को छह दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। धमकी दी थी कि किसी को भी यह जानकारी दी तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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वाराणसी में पुलिस ने दर्ज किया मामला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साइबर जालसाजों ने बुजुर्ग को नरेश गोयल मनी लॉन्डरिंग केस में गिरफ्तारी की धमकी देकर 1.10 करोड़ साफ कर दिए। बुजुर्ग को छह दिन तक डिजिटल अरेस्ट पर रखा। मुंबई पुलिस तो कभी सीबीआई आफिसर बनकर साइबर जालसाज मोबाइल कॉल पर धमकाते रहे। 

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हार्ट के मरीज बुजुर्ग ने अपने विभिन्न बैंक खाते से पूरी रकम दे दी। पीड़ित बुजुर्ग ने गुरुवार को साइबर क्राइम थाने में साइबर धोखाधड़ी समेत अन्य आरोपों में केस दर्ज कराया। लठिया स्थित यश विहार कालोनी निवासी बुजुर्ग महेश प्रसाद ने साइबर क्राइम पुलिस को बताया कि आठ मई की अपराह्न 3 बजे टेलीकॉम डिपार्टमेंट से फोन आया कि आपका मोबाइल दो दिनों के बाद बंद कर दिया जाएगा। 

मैंने कारण पूछा तो बताया गया कि आप पर कोलाबा पुलिस स्टेशन मुंबई में एफआईआर दर्ज है। अवैध तरीके से पैसा निकालने का आरोप है। इसलिए कोलाबा पुलिस से संपर्क करें। एक नंबर भी दिया गया। उक्त नंबर पर संपर्क के दौरान कहा गया है कि एफआईआर सही है, आप कोलाबा आ जाए।
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मैंने सीनियर सीटीजन होने और हार्ट की बीमारी के बारे में बताकर कहा कि मैं आने में असमर्थ हूं, तब पुलिस अधिकारी ने कहा कि आपके आवास पर ही मोबाइल पर पूछताछ करूंगा। 

पुलिस कर रही पड़ताल

लक्खीसराय में होने की बात कही और स्थाई घर लठिया लौटने पर कहा कि आपके आधार कार्ड पर आपके नाम से नरेश गोयल जो मनी लॉन्डरिंग केस में जेल में है, उसने केनरा बैंक में पैसों की निकासी की है। यह 538 करोड़ मनी लॉन्डरिंग का केस है। इसमें आपके नाम और आधार कार्ड का मिस-यूज किया गया है। अतः संदेह है कि इसमें आपका हाथ हो सकता है, उसने एक डेबिट कार्ड दिखलाया, जिस पर महेश प्रसाद प्रिंट था।

तब मैने कहा कि आधार कार्ड हमेशा मेरे पास ही रहता है। मैंने किसी को भी नहीं दिया है। डेबिट कार्ड मैंने आज तक उपयोग नहीं किया है। ऑनलाइन पैसे का ट्रांसफर नहीं करता हूं। इसके बाद घर के अन्य परिवार के बारे में, बैंक और पैसे के बारे में, मकान, जमीन, सोना चांदी आदि के बारे में पूछा। 
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तीन दिन में पैसा वापस करने की कही थी बात

कहा कि अपना मोबाइल रात भर चार्ज में लगाकर रूम में रखें, मोबाइल का इस्तेमाल आप नहीं करेंगे। दूसरे दिन उसने कहा कि यह नेशनल कांफिडेंस का मामला है। किसी से भी यहां तक की बेटे से भी इस विषय पर बात नहीं करेंगे। आपका मोबाइल मेरी नजर में है। यदि किसी को भी बताया तो उसे गिरफ्तार कर लेंगे। आप जब तक पुलिस को सहयोग करते रहेंगे तब तक अरेस्ट नहीं करेंगे। अगले दिन से आप से ऑफिसर बात करेंगे।

बुजुर्ग महेश ने साइबर क्राइम थाने की पुलिस को बताया कि इसी तरह 13 मई तक मुझे परेशान करता रहा। 14 मई एक मैडम ने अपने को सीबीआई का अफसर बताया और कहा कि आप अपने बैंक का सारा पैसा आरटीजीएस कर दें, क्योंकि इसकी जांच करनी है। इस तीन बैंकों से 15 मई तक एक करोड़ दस लाख रुपये का आरटीजीएस किया है। 

पैसे की जांच करने के बाद भी उसने फंड को मेरे बैंक में नहीं भेजा, जबकि मुझे नियम के अनुसार तीन दिन के बाद भेज देना चाहिए था। तब मुझे संदेह हुआ कि मुझे साइबर कांड में फंसा दिया गया है। साबइर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्र ने बताया कि मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच की जा रही है।
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