वाराणसी में सोमवार को एक बड़ा ट्रेन हादसा टल गया जब असामाजिक तत्वों ने पटरी के बीचों-बीच लोहे की रॉड रख दिया, लेकिन लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए जिससे हादसा टल गया। निगतपुर स्टेशन के पास सोमवार की शाम दानापुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस ट्रैक पर लोहे की रॉड से टकरा गई। हालांकि चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन की रफ्तार धीमी कर दी और दुर्घटना होने से बचा लिया।
ट्रैक पर रखा लोहे का रॉड ट्रेन के इंजन में फंस गया। पास में ही समपार फाटक पर तैनात कर्मचारी की सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने रेती से रॉड काटकर निकाला। करीब आधे घंटे बाद ट्रेन वहां से रवाना की गई। चालक और गार्ड की ओर से निगतपुर स्टेशन पर कटे रॉड को जमा करा दिया गया। घटना से रेल महकमे में हड़कंप मचा रहा।
दानापुर सिकंदराबाद एक्सप्रेस (12792) सोमवार को राजातालाब रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ी और शाम करीब 6.15 बजे जैसे ही निगतपुर स्टेशन के करीब पहुंची तभी लोको पायलट रवि शंकर को ट्रैक पर लोहे का बड़ा रॉड दिखाई दिया। लोको पायलट रविशंकर प्रसाद और सह लोको पायलट महेश चंद मीणा ने तुरंत ही ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया और इसकी जानकारी गार्ड नंदलाल यादव को दी।
रॉड के पास पहुंचने तक ट्रेन की रफ्तार काफी कम हो गई। इमरजेंसी ब्रेक लगाने के चलते यात्रियों को जोर का झटका लगा। ट्रेन रुकते ही बड़ी संख्या में यात्री भी बाहर निकल आए। इस घटना की सूचना कंट्रोल को दी गई।
मौके पर रेलकर्मियों के साथ आरपीएफ पहुंची और ट्रेन को निगतपुर स्टेशन ले आया गया। जहां जांच के लगभग 40 मिनट बाद ट्रेन को आगे रवाना कर दिया गया। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि इस मामले की जांच आरपीएफ कर रही है।
15 दिन में पांच ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचीं
पिछले 15 दिन में वाराणसी जिले में पांच ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचीं। कोई रेल ट्रैक पर रॉड छोड़ गया तो कोई बाइक। चालकों की सूझबूझ से बड़े हादसे तो बच गए मगर रेल ट्रैक की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने तक पर गंभीरता से काम नहीं हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे हल्का मामला बता पल्ला झाड़ लिया तो वहीं, आरपीएफ मुकदमा दर्ज कर खानापूर्ति तक ही सीमित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के पड़ोसी जिले बनारस में रेल सुरक्षा के साथ मनमानी हो रही है। यह आलम तब है जब पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के डीआरएम और उत्तर रेलवे वाराणसी के एडीआरएम जैसे वरिष्ठ अधिकारी यहां बैठते हैं।
अक्तूबर के पहले हफ्ते में बनारस से नई दिल्ली जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन शिवगंगा के इंजन में ओएचई का तार लिपट गया था। इसके बाद मंडुवाडीह नई दिल्ली सुपरफास्ट, गोरखपुर-पुणे, सुल्तानपुर पैसेंजर और मरुधर एक्सप्रेस के साथ घटनाएं घटी। सभी घटनाओं में लोको पायलट की सतर्कता महत्वपूर्ण रही, जिससे बड़ा हादसा नहीं हुआ।