बैंकों-डाकघरों में कैश की जबरदस्त किल्लत से अब हालात बेकाबू होने के कगार पर हैं। बैंकों और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद हालात कतई दुरुस्त नहीं हैं। शहर से गांवों तक बैंकों से एटीएम तक रोजाना कतार लगाते लोग थक गए हैं। सबसे अधिक दिक्कत नोटबंदी के बाद से ध्वस्त एटीएम व्यवस्था के अब तक सुचारु न होने से है। 25 से 30 फीसदी एटीएम भी चालू हालत में नहीं हैं। इक्का-दुक्का एटीएम को छोड़ दिया जाए तो शहर से गांवों तक लोग नकद निकासी के लिए परेशान हैं। बैंकों से भी जरूरत के मुताबिक रुपये नहीं मिलने से परेशानी दोगुनी हो गई है।
दरअसल, मांग के अनुरूप नई करेंसी आरबीआई की ओर से अब तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। प्रशासन के दावे के विपरीत हालात ऐसे हैं कि बैंकों में स्थिति संभालने के लिए सौ करोड़ के स्वॉइल नोट खपाए जा चुके हैं। ये कटे-फटे-गले नोट बैंककर्मी मॉस्क लगाकर बांट रहे हैं। बैंकों के अफसर दबी जुबान से स्वीकार रहे हैं कि स्थिति को नियंत्रित कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। आए दिन बैंक कर्मियों और ग्राहकों में कैश के लिए नोकझोंक हो रही है। बुधवार को दारानगर स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में लोगों की बैंक कर्मियों से नोकझोंक से माहौल गरमाया।
दो हजार के नोट तो कुछ दिन पहले बाजार में आए लेकिन 500 रुपये के नोट बाजार में नहीं दिख रहे हैं। इसलिए जिन बैंकों से कैश दिए जा रहे उसमें दो हजार के नोट ही अधिक मिल रहे हैं। अगर 500 के नये नोट पर्याप्त मात्रा में आ जाए और उसे दो हजार की तरह एटीएम में डाल दिया जाए तो कुछ हद तक समस्या दूर हो जाएगाी।
संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी भवन सभागार में केंद्र सरकार की ई-गर्वनेंस योजना के तहत आयोजित गो कैशलेस-गो डिजिटल विषयक कार्यशाला में लोगों ने कैशलेस सिस्टम के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लिया। मुख्य अतिथि एडीएम राजस्व ईश्वरचंद ने कहा कि सरकार ने कैशलेस सोसायटी बनाने की दिशा में राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत स्मार्ट फोन के माध्यम से आमजन दैनिक उपभोग की वस्तुओं की खरीद भी कर सकते हैं। कैशलेस भुगतान से लेन-देन में जहां पारदर्शिता आएगी वहीं देश के विकास में तेजी आएगी। जिला विज्ञान एवं सूचना अधिकारी प्रसन्न पांडेय और स्टेट मैनेजर सीएससी शशि शुक्ला ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत प्रबंधक प्रेम नारायण सिंह और धन्यवाद ज्ञापन उमेश राय ने किया।
नोट बंदी के बाद से ऐसा नहीं है कि केवल जनता परेशान है, बैंक के अधिकारी-कर्मचारी भी दिन रात इसी चक्कर में लगे हैं कि जरूरत के हिसाब से कैश कैसे उपलब्ध हो। बुधवार को काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की मैदागिन शाखा सहित अन्य शाखाओं पर नो कैश (नगदी नहीं है) की सूचना चस्पा रही। यहां आने वाले लोग बस इसी जानकारी में लगे रहे कि आखिर कब रुपये मिलेंगे। क्षेत्रीय प्रबंधक श्रीकांत उपाध्याय ने बताया कि आरबीआई से मांग के अनुरूप कैश न मिलने से दिक्कत है। प्राय: कई शाखाओं पर कर्मचारियों से नाेंकझोंक की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। लोहता संवाददाता के अनुसार नोट बंदी के बाद सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण बैंकों के खाता धारकों को हो रही है। यहां बैंकों में कैश की कमी के साथ ही एटीएम भी बंद हैं।
कैश की कमी की वजह से बुधवार को भी शहर के अधिकांश एटीएम नहीं चले। नोट बंदी के करीब महीने भर बाद भी इस तरह की व्यवस्था नहीं हो पाई कि जिससे कि लोगों को जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में एटीएम से रुपये मिल सके। बुधवार को एसबीआई, यूबीआई, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, यूको बैंक आदि बैंकों के एटीएम पर अन्य दिनों की तरह ताला लटकता रहा।
नोटबंदी से ग्रामीण इलाकों के बैंकों में जारी रुपयों की किल्लत की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को घंटों लाइन में जूझने के बाद भी अधिकतर लोगों को रुपये नहीं मिले। दानगंज के नियारडीह स्थित काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक 15 दिन बाद कैश आने की सूचना पर पहुंचे लोगों ने महज एक-एक हजार रुपये दिए जाने पर हंगामा किया। वहीं, यूनियन बैंक में भी किसी को दो हजार तो किसी तीन हजार रुपये दिए गए। मिर्जामुराद स्थित एसबीआई में लंबी कतारे लगने से हाईवे की सर्विस रोड पर आवागमन बाधित हो गया। काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक भी खूब भीड़ रही। वहीं, बाजार के सारे एटीएम बंद रहे। रोहनिया क्षेत्र के जगतपुर स्थित एसबीआई में सुबह बैंक खुला तो कतार में खड़े लोगों को बताया गया कि रुपये ही नहीं हैं। इस पर भीड़ ने हंगामा किया। आराजीलाइन क्षेत्र के जक्खिनी के यूबीआई में भी रुपये न होने से लोगों को निराश लौटना पड़ा। चोलापुर क्षेत्र के बैंकों में सुबह दो घंटे के बाद ही रुपये खत्म हो गए। बड़ागांव के काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक बिरॉव कोट में रुपये न आने के कारण लोग मायूस लौटे। यूनियन बैंक, बड़ागांव में भी कैश की किल्लत रही। चौबेपुर में ओरियंटल बैंक, स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक में दोपहर के पहले ही रुपये खत्म हो जाने से लोग परेशान रहे। कछवा रोड में बैंक ऑफ बड़ौदा में रुपये न मिलने पर लोगों ने गहरा रोष जताया।