नोटबंदी के बाद उपजे हालात में नकदी संकट देखते हुए सरकार लोगों से कैशलेस सिस्टम अपनाने का आग्रह कर रही है। क्रेडिट-डेबिट कार्ड से अब तक दूर रहने वाले लोग इस सिस्टम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि नोटबंदी की घोषणा के 28 दिन बाद नकदी संकट इस कदर गहरा गया है कि अब तो बैंक-एटीएम और आमजन सभी ‘कैशलेस’ हो चुके हैं। न बैंकों में पर्याप्त रकम है और न ही एटीएम में। ऐसे में लोगों की जेबें भी खाली हैं। घरों में रुपये की किल्लत के चलते किचकिच बढ़ती जा रही है।
बैंकों में मंगलवार को बंदी के चलते हर किसी ने रुपये निकालने के लिए एटीएम की ओर रुख किया लेकिन अधिकांश लोगों की ये हसरत पूरी न हो सकी। जिले में विभिन्न बैंकों के 650 से अधिक एटीएम हैं। इनमें आधे से अधिक अब तक नई करेंसी के मुताबिक अपग्रेड ही नहीं हो सके हैं। जो अपग्रेड हुए भी उनमें कैश नहीं है। जिले में नकदी संकट दूर करने के लिए तत्काल बैंकों और एटीएम में करीब 400 से 500 करोड़ रुपये की जरूरत है। समस्या यह है कि इसकी आधी रकम भी नहीं मिल पा रही है। मंगलवार को भी मलदहिया, लहरतारा, सुंदरपुर, नदेसर, गोदौलिया, पांडेयपुर, पहड़िया आदि जगहोें पर एसबीआई, यूबीआई, पीएनबी, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक आदि के एटीएम से रुपये नहीं मिले। जिन एटीएम में रुपये थे वहां लंबी कतारें लगी रहीं।
नकदी संकट हल न होने से समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज को लेकर हो रही है। न तो जरूरत के अनुरूप बैंकों, एटीएम से रुपये मिल पा रहे हैं। दो हजार की नोट से छुट्टे का संकट अलग बना हुआ है। बिहार भभुआ की बनारसी देवी को अपने बेटे के आपरेशन के लिए उधार पैसे लेने पड़े। सर सुंदरलाल अस्पताल में बनारसी देवी के बेटे का आपरेशन हुआ। कंदवा के अरुण कुमार सिंह ने बताया कि लंका स्थित निजी अस्पताल में जांच के लिए तो कार्ड से पेमेंट कर दिया मगर जब दवा लेने की बारी आई तो मेडिकल स्टोर वाले ने हाथ खड़े कर दिए। किसी तरह घंटोें एटीएम पर लाइन लगाकर पैसे निकाले तब दवा खरीद पाया। सासाराम के भोला 15 दिनों से अपने बेटे रमाकांत के इलाज के लिए बीएचयू में हैं। रोजाना जांच-दवा के पैसे लग रहे हैं। बताया, दवा के लिए पुराने नोट लेने से पहले आईडी प्रूफ की कॉपी मांगी जा रही है।
कज्जाकपुरा निवासी विश्वनाथ प्रसाद की बेटी अर्चना तीन दिसंबर से महिला अस्पताल कबीरचौरा में भर्ती है। डिलेवरी के बाद कुछ दवाइयां तो उन्हें अस्पताल से मिल जा रही हैं लेकिन बाहर मिलने वाली दवाओं, चाय-पानी आदि जरूरी सामानों के लिए उनके सामने नकदी का संकट है। बताया कि घ्ार के बचत के रुपयों से किसी तरह काम चला लेकिन अब नकद पैसे नहीं बचे हैं। घ्ांटों एटीएम पर लाइन लगाने के बाद भी पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। अस्पताल में मरीज छोड़कर हर दिन लाइन भी नहीं लगा सकता। चौक निवासी महेंद्र कुमार की पत्नी महिला अस्ताल में भर्ती हैं। महेंद्र ने बताया कि नोटबंदी के चलते कैश की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। दोस्तों, रिश्तेदारों से रुपये मांग कर लाए थे, उससे इलाज कराया लेकिन अब वो पैसे भी खत्म हो गए हैं। हर दिन कुछ न कुछ दवाइयां बाहर से लानी पड़ रही हैं। भोजन, पानी-नाश्ते का भी रोज का खर्च है। दो-तीन दिन से बैंक और एटीएम का चक्कर लगाने के बाद कहीं रुपये नहीं मिल रहे हैं। कल फिर बैंक जाऊंगा। पैसे नहीं मिले तो फिर किसी से उधार लेना पड़ेगा।
रिजर्व बैंक से जिले के बैंकों को प्रतिदिन सौ करोड़ रुपये मिलें तो कैश का संकट खत्म हो। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई की ओर से कैश नहीं मिल रहा है। एसबीआई मुख्य शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि एटीएम में जितने नोट भरे जा रहे हैं, वे दो घंटे में ही खत्म हो जा रहे हैं। बॉब, यूबीआई, पीएनबी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, बीओआई आदि बैंकों में भी कैश का संकट जबरदस्त है। कारोबारी-दुकानदारों की ओर से स्वाइपिंग मशीन की डिमांड दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। अब तक तकरीबन 500 स्वाइपिंग मशीन लगाई गई है। लीड बैंक मैनेजर रंजीत सिंह ने बताया कि कैश की समस्या से निबटने के लिए जन सुविधा केंद्र संचालकों को बुधवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
चोलापुर के पलहीपट्टी में छुट्टी के दिन भी यूनियन बैंक के सामने लोग सुबह से ही कतार में खड़े हो गए। बाद में पता चला कि बैंक बंद है तो निराश होकर लौट गए। बड़ागांव, पिंडरा, चौबेपुर, रोहनिया, आराजीलाइन, सेवापुरी, कछवारोड, मिर्जामुराद, दानगंज, शिवपुर, हरहुआ, बाबतपुर समेत जिले के सभी प्रमुख बाजारों में एटीएम ने मंगलवार को भी लोगों को निराश किया। 70 से 80 फीसदी एटीएम बंद रहे।
आठ नवंबर के बाद से बिजली बिल मद में दो लाख रुपये से अधिक जमा करने वालों की जानकारी आयकर विभाग की ओर सेे मांगी गई है। इसके लिए आयकर विभाग ने बिजली विभाग को नोटिस भेजा है। हालांकि बिजली विभाग के अधिकारियों नेे इस बारे में पूछे जाने पर ऐसे किसी नोटिस से इनकार किया है। उधर, आयकर विभाग ने स्कूल संचालकों और सराफा कारोबारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की है। आयकर विभाग के लखनऊ मुख्यालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो पुराने नोट के जरिए जिन उपभोक्ताओं ने दो लाख रुपये से अधिक का बिल चुकाया है, उन पर नजर रखी जा रही है। उनके बारे में बिजली विभाग से विवरण मांगा गया है। इसके लिए एक पखवारे का समय दिया गया है। इसके बाद संबंधित उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर पड़ताल की जाएगी। आठ नवंबर के बाद से सराफा की दूकानों पर दो लाख रुपये से अधिक की खरीदारी करने वालों और स्टाफ को एक साथ कई महीने का वेतन देने वाले स्कूल संचालकों की भी सूची तैयार की जा रही है।