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तबले पर बनारसबाज के ताल बने यादगार

Mon, 20 Apr 2015 02:08 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
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वाराणसी। बंगला नववर्ष का स्वागत रविवार की शाम गायन, वादन और नृत्य की यादगार प्रस्तुतियों के साथ किया गया। बंगीय कला, संस्कृति और रीति-नीति को मानने वाले इस उत्सव में नबो आनोंदे जागो आजि, नबो रोबि किरोणे... की कामना से आए थे।
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नए साल के आगमन पर बधाई भी दी गईं और मिठाई भी बांटी गई। यह कार्यक्रम बंगाली टोला इंटर कॉलेज परिसर में बंगीय समाज की ओर से किया गया था।
भव्य मंच पर शुरुआत हुई बाल कलाकार देवादित्य मुखर्जी के शिव तांडव स्तोत्र पर आधारित कथक नृत्य से। इसके बाद सांस्कृतिक संस्था ‘प्रतिध्वनि’ के कलाकारों ने रूपाली बागची के निर्देशन में कवि जयदेव के ‘गीत गोविंद’ पर आधारित नृत्य नाटिका‘नृत्ये एवं छंदे कवि जयदेव’ का मंचन किया।
इसमें दीपक गुण, अनिंदो सान्याल, राहुल मुखर्जी, अनुश्री बनर्जी, दीपक भारती, मधुमिता बनर्जी, शिप्रा, अमृता चक्रवर्ती, रिती सान्याल,अंकुर बागची, अभिषेक बसाक का अभिनय सराहा गया। इनके बाद प्रसिद्ध कंठे महाराज की परंपरा के तबला वादक डॉ. देवव्रत भट्टाचार्य ने तीन ताल में तबला वादन से फिजा बदल दी।
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उन्होंने तबले पर कायदा, टुकड़ा,रेला, बाट, परन, तिहाई,चक्करदार के अलावा पुरानी बंदिशों पर छंद बजाकर वाहवाही बटोरी। सारंगी पर लहरा दिया अनीस मिश्र ने। संचालन संस्था के उपाध्यक्ष अशोक कांति चक्रवर्ती ने किया। इस मौके पर महेंद्र केशरी बनर्जी, शेखर मुखर्जी, आशीष दास, इंदुभूषण भट्ट, अतनु कुमार मुखर्जी, श्यामा प्रसन्न भट्टाचार्य,एसपी राय समेत अन्य लोग उपस्थित थे। बतौर मुख्य अतिथि डॉ.संजय मेहता ने बंगीय कला-संस्कृति पर रोशनी डाली।
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