वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में लंबे समय से अटकी शोध में दाखिले की प्रकिया फिर शुरू होगी। साथ ही विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रहे नेट उत्तीर्ण शिक्षक भी पीएचडी कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें सवेतन अध्ययन अवकाश दिया जाएगा। साथ ही चिकित्सा विज्ञान संकाय खुलेगा और इसके तहत बीएएमएस कोर्स शुरू किया जाएगा। शनिवार को कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में ऐसे कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
विद्यापीठ में पिछले चार सालों से शोध में प्रवेश की प्रक्रिया ठप थी, जिस कारण विद्यार्थी काफी परेशान थे। केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित विद्या परिषद में पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया। तय हुआ कि जल्द ही सभी विभागों से खाली सीटों का ब्यौरा मंगाया जाएगा। साथ ही कोर्स वर्क की अवधि को दो वर्ष की शोध अवधि में शामिल करने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय के
जो शिक्षक शोध करना चाहते हैं, उन्हें छह माह का कोर्स वर्क करना होगा और इसके लिए उन्हें सवेतन अवकाश दिया जाएगा। दूसरे संस्थान/विश्वविद्यालय में शोध कराने वाले शिक्षकों को भी सवेतन अवकाश की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रेस प्रवक्ता डॉ. एमएम वर्मा ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान संकाय खोलने और बीएएमएस कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी बैठक में मंजूरी दी गई। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए विद्यार्थियों की कापियों को स्कैन कराकर वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्णय हुआ। पहले चरण में विभागों के टॉपरों की कापियां ऑनलाइन की जाएंगी।
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ये भी हुए फैसले
0 च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने के लिए विभागाध्यक्षों की मांगी गई राय।
0 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के तहत एमए/एमससी होम साइंस (क्लाथिंग एंड टेक्सटाइल) कोर्स शुरू होगा।
0 ललित कला और मंच कला विभाग को मिलाकर ललित कला एवं संगीत संकाय का गठन होगा।
0 एमए संस्कृत में टॉपरों को हर साल स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती स्वर्ण पदक देने पर मुहर।
0 कृषि विज्ञान संकाय समिति में बाहरी विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।