वाराणसी (ब्यूरो) । ध्रुपद तीर्थ के रूप में विख्यात तुलसी घाट पर शनिवार की शाम नई पीढ़ी ने सुर-साज पर अपने अंदाज से रागों के रंग और तानों की खुशबू फैलाई।
प्राचीन वाद्य सारंगी पर बेजोड़ युगलबंदी यादगार बनी तो पं. रीतेश-रजनीश मिश्र ने ख्याल गायन की अलापचारी से चार चांद लगा दिया।
वहीं, संगत में तबले पर संजू सहाय ने अपने तिहाई, टुकड़ों से फिजा बदल दी। इसी के साथ दो दिनी हर्षोत्सव संगीत समारोह शुरू हो गया। यह कार्यक्रम प्रसिद्ध सारंगी वादक पं. हनुमान प्रसाद मिश्र जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद शुरुआत राधिका मिश्रा के गायन से हुई। उन्होंने गुरु वंदना प्रस्तुत की। बोल थे-धर ध्यान गुरु चरन कमल को...।
इनके बाद शिवानी मिश्रा, राजेश मिश्रा और अनीश मिश्र ने सारंगी पर रागयमन की अवतारणा की। फिर, पं. कन्हैया लाल मिश्र और भारत भूषण की सारंगी पर युगलबंदी हुई।
अंत में पं. राजन-साजन के शिष्य रीतेश-रजनीश की जोड़ी ने मंच संभाला। विलंबित लय में एक ताल की बंदिश की राग मालकौश में इन्होंने अवतारणा की। बोल थे-पीर न जानी बलमा...।
इसी राग में मध्य लय तीन ताल में निवबद्ध दूसरी बंदिश के बोल थे-कल न परे मोहे श्याम...। तबले पर पं. संजू सहाय, सारंगी पर मुराद अली और तानपूरे पर लंदन से आई नताशा, कांता प्रसाद मिश्र थे।
संचालन स्वरांश मिश्र ने किया।
बैजू बावरा की समाधि पर वायलिन से बदली फिजा
वाराणसी। वायलिन पर रागों की अवतारणा और धुनों की कशिश ने शनिवार की रात संगीत प्रेमियों को तृप्त कर दिया। मौका था दशाश्वमेध घाट पर भगवान दत्तात्रेय की जयंती पर आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह का।
यह कार्यक्रम ऊं दत्त फाउंडेशन और गंगा महासभा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर संतोष दास महाराज सतुआ बाबा ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद
पं. रामचंद्र भागवत ने वायलिन पर राग विहाग की अवतारणा की।
इसके बाद राग जय जयवंती में भी बंदिश बजाई। तबले पर पं. पुंडलीक कृष्ण भागवत ने संगत की।
पारंपरिक गीतों से गूंजा संकट मोचन का दरबार
वाराणसी। संकट मोचन के दरबार में शनिवार की रात पारंपरिक गीतों, भजनों की गूंज पर भक्त झूमते रहे। राम विवाह पंचमी के उपलक्ष्य में आयोजित मानस पारायण यज्ञ और मानस सम्मेलन के क्रम में यह कार्यक्रम किया गया था।
भव्य मंच पर शुरुआत हुई ऋतुराज कात्यायन की गणेश वंदना से। गाइए गणपित जगवंदन... के बाद जाइ न बरनि मनोहर जोई... और फिर सीताराम जी की प्यारी राजधानी लागे... की प्रस्तुति कर उन्होंने माहौल को ऊंचाई दी।
इनके बाद रेवती साकलकर ने संकट मोचन की स्तुति की। झूला गीत-सिया संग बगिया में झूलें रामलला.. को सुनाकर उन्होंने हर किसी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। मासूम रजा बजरंगी ने राम नाम से तूने क्या मुख मोड़ा... के बाद हे जागो बजरंगी तुम्हें श्रीराम पुकारे..की प्रस्तुति की।
अंत में इंद्रेश मिश्र ने द्वार पूजा गीत के बाद सेहरा गीत और राम विवाह के गीतों से संकट मोचन के दरबार को गुलजार किया।