वाराणसी शहर में जाम की समस्या डेढ़ दशक से पुरानी है। औसतन 200 बाइक और 100 कार 30 मिनट तक जाम में फंसी रहती हैं। एक बाइक जहां करीब 40 रुपये का पेट्रोल जाम में जला देती है, वहीं एक कार में यह नुकसान 80 रुपये तक पहुंच जाता है।
सिर्फ एक दिन में ईंधन का यह नुकसान करीब 16 हजार रुपये बैठता है। यही आंकड़ा महीने भर में 4.80 लाख और पूरे साल में करीब 44.80 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। यानी शहर हर साल जाम में खड़े-खड़े लाखों रुपये धुएं में उड़ा रहा है।
जाम से निजात दिलाने के लिए हर संभव प्रयास पुलिस कर रही है लेकिन निजात नहीं मिल रही। कारण अव्यवस्था, सड़कों पर अतिक्रमण और बेतरतब्बी वाहनों की सड़कों पर पार्किंग है।
कई बार अफसरों की तरफ से डायवर्जन समेत कई व्यवस्थाएं की गई। लेकिन ट्रैफिक जाम एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाता है। खासकर लहरतारा तिराह, लंका चौराहा, पांडेयपुर चौराहा, रथयात्रा और मैदागिन पर सुबह दोपहर और शाम को दो-दो घंटे जाम लगता है।
ये जानकार आश्चर्य होगा कि इस जाम में फंसकर बनारस के लोग एक साल में 44.80 लाख रुपये का इंधन फूंक देते हैं। जबकि इतनी रकम में सभी प्रमुख चौहारों पर सिग्नल लाइट और खाली स्थान पर पार्किंग बन जाए।