डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय
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जेएनयू में हमले के विरोध में शिक्षकों-छात्रों ने निकाला मार्च
जेएनयू में रविवार शाम को हुए हमले के विरोध में मंगलवार को बीएचयू में शिक्षकों-छात्रों ने मार्च निकाला। अनुसूचित जाति, जनजाति छात्र कार्यक्रम आयोजन समिति, ओबीसी, एससी,एसटी, एमटी संघर्ष समिति के बैनर तले लोगों ने निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
मधुबन पार्क में आयोजित सभा में इतिहासविद प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार ने कहा कि जेएनयू पर किया गया हमला आतंकी हमले से कम नहीं है। हथियारबंद अपराधियों का नकाबपोश गैंग निहत्थे और निर्दोष छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों की सुनियोजित तरीके से हत्या करने पर आमादा नजर आए। इस घटना से ऐसा लगा जैसे देश में संविधान और कानून का राज खत्म हो चुका है और देश तालिबानी शक्तियों के हाथों में जा पहुंचा है। घटना पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस, जेएनयू प्रशासन की चुप्पी संदेहास्पद है।
हिन्दू रक्षा दल जैसे धर्म के नाम पर आतंक फैलानेवाले संगठन ने हमले की जिम्मेदारी भी ली है, इसके बावजूद अभी तक हमलावरों को गिरफ्तार नहीं किया गया। सभा में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के शिक्षक डॉ. शांति लाल साल्वी सहित चंदन सागर, राहुल यादव, संदीप गौतम, विकास सिंह, अजय कुमार, सूर्यमणि गौतम, टिंकू कुमार, श्यामबाबू मौर्य, अर्चना बौद्ध आदि मौजूद रहे।
अभाविप पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित
बीएचयू की अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग से संबंधित छात्र संगठनों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने प्रतिरोध सभा में एक सामूहिक प्रस्ताव पास कर घटना की निंदा की। इस दौरान हमलावरों की तुरंत गिरफ्तारी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, हिन्दू रक्षक दल जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।