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Odisha Train Accident: बालासोर ट्रेन हादसे के बाद बरेका में बढ़ी सतर्कता, उप महाप्रबंधक ने लिया ये बड़ा फैसला

Thu, 08 Jun 2023 08:39 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बरेका के उप महाप्रबंधक विजय का कहना है कि इंजन निर्माण की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। इंजन बनाने और मरम्मत में जो भी दिक्कत आए, उसे कर्मी जरूर बताएं। अगर इंजन फेल हो जाए तो तुरंत रिपोर्ट दें। इसमें चीफ सेफ्टी ऑफिसर की ड्यूटी भी लगाई गई है
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बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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ओडिशा के बालासोर में ट्रेन हादसे और जनहानि के बाद बनारस रेल कारखाना (बरेका) में सतर्कता बढ़ा दी गई है। नए इंजन के निर्माण और पुराने इंजन के मरम्मत की निगरानी कराई जा रही है। ऑडिट टीम बनाकर रोजाना छोटी कमियों की रिपोर्ट ली जा रही है। कर्मचारियों की काउंसिलिंग भी की जाएगी ताकि कर्मचारी गलतियां बताएं और उसे समय से ठीक कर लिया जाए।

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बरेका के उप महाप्रबंधक विजय का कहना है कि इंजन निर्माण की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। इंजन बनाने और मरम्मत में जो भी दिक्कत आए, उसे कर्मी जरूर बताएं। अगर इंजन फेल हो जाए तो तुरंत रिपोर्ट दें। इसमें चीफ सेफ्टी ऑफिसर की ड्यूटी भी लगाई गई है। वह प्रतिदिन के दिशा-निर्देशों की ऑडिट करेंगे। कोई स्टाफ या अधिकारी लापरवाही करता मिला तो उसकी रिपोर्ट देंगे। इंजन निर्माण के दौरान कई बार गलतियां हो जाती हैं, लेकिन कर्मचारी इसे साझा नहीं करते हैं। वे डरते हैं। साथ ही जुगाड़ तकनीक से गलतियां दूर कर देते हैं। इससे परेशानी बढ़ सकती है।

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Odisha Train Accident - फोटो : ANI

बरेका में बना है बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त कोरोमंडल ट्रेन का इंजन

बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त कोरोमंडल ट्रेन का इंजन वर्ष 2020 में बरेका ने बनाया था। इलेक्टि्रक इंजन की क्षमता छह हजार अश्व शक्ति की है। उप महाप्रबंधक विजय का दावा है कि इंजन का निर्माण अच्छा था, इसलिए पलटा नहीं। इंजन मालगाड़ी के डिब्बे पर चढ़ गया। अगर इंजन पलटता तो और बड़ा नुकसान हो सकता था। इंजन का वजन ज्यादा होता है। इसके पलटने के बाद आसपास की पटरियों से गुजरने वाली ट्रेनों को ज्यादा नुकसान पहुंचता। ज्यादा बोगियां क्षतिग्रस्त हो सकती थीं। इससे जनहानि बढ़ने का खतरा रहता। उप महाप्रबंधक के मुताबिक सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) डिजाइन की बोगियां बनाई जा रही हैं। कोरोमंडल ट्रेन की बोगियां भी एलएचबी थीं। पहले आईसीएफ डिजाइन की बोगियां होती थीं, जो बहुत अच्छी नहीं मानी जाती थीं।
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