वाराणसी। संत गाडगे की जयंती पर सोमवार को काशी में निकली शोभायात्रा में सैलाब उमड़ पड़ा। रथों, बग्घियों और घोड़ों पर सवार होकर लोग बाजेगाजे के साथ निकले।
चेतसिंह किला हाता परिसर में संत गाडगे की सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। यह पहला मौका था जब वन विभाग ने इस शोभायात्रा में हाथी और ऊंटों को शामिल करने की स्वीकृति नहीं दी।
बेनियाबाग से दोपहर बाद कन्नौजिया समाज के लोगों ने संत गाडगे की याद में शोभायात्रा निकाली। नई सड़क, गिरिजाघर, गोदौलिया से पांडेय हवेली, सोनारपुरा होते हुए शोभायात्रा चेतसिंह किला हाता परिसर में शाम पांच बजे पहुंची।
इस दौरान भीड़ उमड़ने से रास्ते भर जाम की नौबत रही।
हाता परिसर में हुई सभा में सूबे के लोक कल्याण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल ने कहा कि संत गाडगे ने जो बदलाव की राह दिखाई थी, उस पर चलने की जरूरत है। उन्होंने कन्नौजिया समाज के हितों की रक्षा के लिए हमेशा प्रदेश सरकार के तत्पर रहने का भरोसा दिलाया। जिला धोबी बचाओ संघर्ष समिति के नंदू कन्नौजिया ने घाटों का मुद्दा उठाया।
इस मौके पर संजय चौबे, रमेश चोपड़ा, बाली कन्नौजिया, भाईलाल कन्नौजिया, राजेश समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए। उधर नदेसर से भी शोभायात्रा निकाली गई। इसमें भैया लाल कन्नौजिया, पीआर कन्नौजिया, अनिल कुमार चौधरी ने हिस्सा लिया।