एनएसडी के निदेशक ने रूपवाणी के स्टूडियो थिएटर का किया उद्घाटन
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विख्यात रंग निर्देशक और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक पद्मश्री रतन थियाम ने बुधवार की शाम कहा कि कठिन अभ्यास, अनुशासन और धैर्य के बिना एक अच्छा नाटक तैयार नहीं हो सकता। रंगकर्म के संयोजन में इन बातों का कोई विकल्प नहीं है।
युवा रंगकर्मियों को मेहनत करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। यह बातें उन्होंने लोहटिया स्थित विवेकानंद स्कूल में प्रसिद्ध रंग समूह रंगवाणी के स्टूडियो थिएटर के उद्घाटन अवसर पर कही।
रंगविद् संगीता गुंडेचा की मौजूदगी में थियाम ने कहा कि किसी भी कलाकृति की तरह नाटक को भी लगातार परिस्कृत करते रहना अनिवार्य है। रंगकर्मियों को कड़ी मेहनत करनी चाहिए, बाकी का काम निर्देशक पर छोड़ देना चाहिए। इसके बाद निराला की कविता ‘राम की शक्ति पूजा’ का मंचन किया गया।
रामलीला के शिल्प में रचे इस संगीतमय नाटक के एक अंश की प्रस्तुति देख रंगविद् भाव विभोर हो उठे। बनारस घराने के संगीत पर आधारित इस नृत्य नाटिका में पुरुष चरित्रों का किरदार लड़कियों ने निभाया।
स्टूडियो थिएटर की जगह के मुताबिक प्रस्तुति ने अपने आप को छोटा बना लिया था। इस कहानी में राम को भगवान नहीं इंसान की तरह दिखाया गया। दूसरे चरित्र भी मनुष्यों की तरह पेश आते हैं।
रामलीला की परंपरा और कविता की आधुनिकता का संगम बखूबी रूपवाणी के इस नाटक में देखा गया। राम की भूमिका स्वाति ने की। लक्ष्मण की भूमिका में काजोल और सीता और देवी की भूमिका नंदिनी ने की।
हनुमान की भूमिका में तापस ने निभाई। निर्देशन ब्योमेश शुक्ल ने किया। पिछले तीन वर्षों में देश भर में इसके 51 मंचन हो चुके हैं।