राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अब दशाश्वमेध घाट पर गंगा पूजन के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। वह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने भी नहीं जाएंगे। बुधवार रात करीब बारह बजे राष्ट्रपति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में एक दिन की कटौती की जानकारी दी गई। संशोधित प्रोटोकाल के अनुसार राष्ट्रपति गुरुवार 12 मई को दोपहर बाद 3:45 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कार्यक्रम और रात्रि भोज में शामिल होने के बाद रात 9:10 बजे नई दिल्ली लौट जाएंगे। 13 मई को गंगा उत्पत्ति दिवस पर राष्ट्रपति के दशाश्वमेध घाट पर पूजा-अर्चना और दुग्धाभिषेक कार्यक्रम को लेकर आयोजक संस्था सर्वोदय सेवा समिति के एक पदाधिकारी द्वारा लाखों रुपये की धन उगाही की शिकायत राष्ट्रपति भवन की गई थी। इस मामले में राष्ट्रपति भवन ने यूपी सरकार को जांच के निर्देश दिए थे। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पूरे मामले पर जिलाधिकारी राजमणि यादव से रिपोर्ट तलब की थी। देर शाम डीएम ने रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेज दी।
समझा जाता है कि शिकायत के बाद पैदा हुए विवाद से बचने के राष्ट्रपति ने अपनी यात्रा में कटौती का फैसला किया है। शहर के रवींद्र पुरी निवासी शिव बारात समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह ने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में लिखा था कि दशाश्वमेध घाट पर होने वाले जिस गंगा पूजन समारोह में आपने अपने आगमन की स्वीकृति दी है, उसके लिए लाखों रुपये चंदा वसूला गया है। दिलीप ने आयोजक संस्था के उपाध्यक्ष अजय शर्मा पर लाखों रुपये की धन उगाही करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने वाराणसी प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा करते हुए लिखा कि जिस आयोजन में राष्ट्रपति के आगमन की स्वीकृति प्रदान की गई है, आयोजक संस्था के पदाधिकारियों की जांच करके राष्ट्रपति भवन को अवगत कराना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। शिकायत का संज्ञान लेकर राष्ट्रपति भवन ने राज्य सरकार को मामले की जांच करने को कहा। आनन-फानन में मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी। इस पर डीएम ने एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय और क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्र को दिलीप के घर भेजा। दोनों अधिकारियों ने उनके बयान दर्ज किए। दिलीप ने कहा कि मुझे राष्ट्रपति के गंगा पूजन कार्यक्रम पर आपत्ति नहीं है लेकिन इस आयोजन से गलत लोगों को दूर रखा जाना चाहिए। बाद में अधिकारियों ने अजय शर्मा से पूछताछ कर उनके भी बयान दर्ज किए। शर्मा से खुफिया विभाग के अधिकारियों ने भी जानकारी ली।
उधर, धन उगाही के आरोपों से आहत होकर अजय शर्मा ने बुधवार दोपहर समिति के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण के अलावा जिलाधिकारी के सामने अपना पक्ष रखा। इस्तीफा देने के बाद अजय ने राष्ट्रपति के गंगा पूजन समारोह से खुद को अलग करने का पत्र जिला प्रशासन को सौंप दिया। अजय ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि साजिश के तहत उन पर झूठा आरोप लगाया गया है। मैंने इस समारोह को लेकर किसी से एक पैसे चंदा नहीं लिया है। हिम्मत हो तो आरोप लगाने वाले सबूत पेश करें।