कोरोना वायरस से दो गज की दूरी का स्लोगन भी अब काम नहीं आएगा। सरकार की तरफ से कोरोना वायरस के हवा में फैलने की एडवाइजरी जारी होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बरतने की अपील की गई है। चिकित्सकों ने भी आम आदमी से अतिरिक्त सतर्कता बरतने और कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने को कहा है।
बीएचयू आईएमएस में मॉलीक्यूलर बायोलॉजी के प्रो. सुनीत कुमार ने बताया कि हवा में संक्रमण दस मीटर कोई निर्धारित दूरी नहीं है, बल्कि यह हवा की रफ्तार, आर्द्रता और तापमान पर भी निर्भर करता है। यह दूरी कम भी हो सकती है और ज्यादा भी। ऐसे में लोगों को डबल मास्क लगाकर रहना चाहिए, इससे बहुत हद तक कोरोना संक्रमण से बचाव हो सकता है। 10 मीटर की दूरी कोई जादुई आंकड़ा नहीं है। वातावरण के अनुसार यह घट और बढ़ भी सकती है।
चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल सिंह ने बताया कि प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने यह मान लिया है कि कोरोना वायरस हवा से भी फैल सकता है। कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स हवा में दो मीटर तक जा सकते हैं, जबकि एयरोसोल उन ड्रॉपलेट्स को 10 मीटर तक आगे बढ़ा सकता है और संक्रमण का खतरा पैदा कर सकता है। यहां तक कि एक संक्रमित व्यक्ति जिसमें कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं, वह वायरल लोड बनाने लायक पर्याप्त ड्रॉपलेट्स छोड़ सकता है जो कई अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसका मतलब साफ है कि अब कोरोना से बचने के लिए 10 मीटर की दूरी भी काफी नहीं है। इसलिए घर से बाहर निकलते समय दोहरे मास्क का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही वैक्सीनेशन पर भी जोर दें और कोरोना प्रोटोकॉल को कभी न भूलें।
एडवाइजरी में ये दी गई है जानकारी
-कोरोना वायरस का प्रकोप कम करने में खुली हवादार जगह अहम भूमिका निभा सकती है। खुली जगह में एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता है। संक्रमित व्यक्ति के नाक से निकलने वाली बूंदें दो मीटर के क्षेत्र में गिर सकती हैं, जबकि और भी छोटी बूंदें हवा के जरिए 10 मीटर तक जा सकती हैं।
-पहले के प्रोटोकॉल के मुताबिक, संक्रमण को रोकने के लिए छह फीट की दूरी आवश्यक बताई गई थी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आने के बावजूद वे संक्रमित हो गए। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि जगह अगर हवादार हो तो संक्रमण से बचाव हो सकता है।
- लार और छींक तथा उससे निकली संक्रमित बूंद वायरस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकती हैं। बड़ी बूंदें जमीन और सतहों पर गिर जाती हैं और छोटी बूंदे हवा में काफी दूरी तक जा सकती हैं। ऐसे स्थान जो बंद हैं और जहां हवा का संचार नहीं है वहां संक्रमित बूंदें कॉन्संट्रेटेड हो जाती हैं और इससे उस इलाके के लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
-पंखा चलाने, खुले दरवाजे और खिड़कियां होने से वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। बंद और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचें।