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एक थी निर्भया... आठवीं बरसी पर पैतृक गांव में कैंडल जलाकर दी गई श्रद्धांजलि, नम आंखों से किया नमन

Tue, 29 Dec 2020 06:34 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया

सार

  • 16 दिसंबर 2012: वसंत विहार में पैरा मेडिकल की छात्रा के साथ एक नाबालिग समेत 6 लोगों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया।
  • 17 दिसंबर 2012: को दिल्ली के वसंत विहार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया।
  • 29 दिसंबर 2012: पीड़िता की सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पूरा देश गुस्से की आग में जल उठा।
  • 20 मार्च 2020 : सुबह 5:30 बजे गुनहगार मुकेश, पवन, विनय और अक्षय कुमार को फांसी पर लटका दिया गया। 
  • गुनहगार राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली। नाबालिग आरोपी को वर्ष 2015 में रिहा कर दिया गया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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एक थी निर्भया... जिसके साथ ऐसा जघन्य अपराध हुआ जिससे लोगों की रूह कांप उठी। उसकी मौत की खबर मिलते ही पूरा देश गुस्से की आग में जल उठा। दुष्कर्म के चार गुनहगारों को वारदात के सात साल बाद दिल्ली में फांसी पर लटकाया गया।

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निर्भया की आठवीं बरसीं पर नरही क्षेत्र स्थित पैतृक गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लोगों ने नम आंखों से पुष्पांजलि अर्पित की। कैंडल जलाकर निर्भया के बाबा और चाचा ने बिटिया को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा में जुटे लोगों ने कैंडल जलाकर निर्भया को नमन किया और उनकी आत्मा शांति को प्रार्थना की। इस मौके पर पूर्व अध्यापक लालजी सिंह, अश्वनी कुमार पांडेय, सुरेश सिंह, सुभाष पांडेय, कन्हैया केशरी, तेज बहादुर पांडेय, अंजनी, रामभरोसे के साथ ही निर्भया ज्योति ट्रस्ट की आर्या पांडेय, दिव्या पांडेय, स्मृति पांडेय आदि उपस्थित रहीं।

उस रात ने खत्म कर दिया था सब कुछ

देहरादून स्थित एक पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया (23) अपने दोनों भाइयों में बड़ी थी। उसकी जिंदगी में 16 दिसंबर 2012 को ऐसी वीभत्स रात आई, जिसने सब कुछ खत्म कर दिया। उस रात चलती बस में गैंगरेप के बाद उसे बस से नीचे फेंक दिया गया। निर्भया के पिता रात 11 बजे ड्यूटी से घर पहुंचे तो मां ने बताया कि अब तक बेटी घर नहीं लौटी। अभी उसकी खोज की उधेड़बुन में ही थे कि 11.10 बजे सफदरजंग अस्पताल से फोन आया कि आपकी बेटी का एक्सीडेंट हो गया है। बेहतर इलाज के लिए 26 दिसंबर 2012 को उसे सिंगापुर ले जाया गया। वहां माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में आज ही के दिन 29 दिसंबर 2012 को इलाज के दौरान सायं चार बजे निर्भया ने दम तोड़ दिया...

निर्भया के पिता, मित्र कैलाश शर्मा के साथ बाइक से सफदरगंज अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने बताया कि बेटी के साथ बहुत जघन्य अपराध हुआ है। उसके शरीर पर कपड़े भी नहीं थे, वह दर्द से लगातार कराह रही थी। पिता ने घर फोन कर कपड़े मंगाए। उसकी हालत देखकर डॉक्टर आश्चर्य में थे कि वह जिंदा कैसे है। सफदरगंज अस्पताल में ऑपरेशन भी हुआ। 17 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया।

घटना को लेकर पूरे देश में उबाल आ गया। सफदरगंज अस्पताल में निर्भया ने बयान भी दिया और दरिंदों को पहचाना भी। नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए 26 दिसंबर 2012 को उसे सिंगापुर ले जाया गया। वहां माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 29 दिसंबर 2012 की सायं चार बजे निर्भया ने दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी जैसे ही दिल्ली पहुंची लोगों में गुस्सा और बढ़ गया। जगह-जगह कैंडल मार्च निकाले जाने लगे। 30 दिसंबर को निर्भया का शव दिल्ली पहुंचा और द्वारिका में अंतिम संस्कार किया गया। 31 दिसंबर को निर्भया के अस्थि कलश को लेकर माता-पिता व दोनों छोटे भाई पैतृक गांव में रात 8.30 बजे अपने घर पहुंचे। गांव में तब तक देश-विदेश की मीडिया का जमावड़ा लग चुका था...

देश मना रहा था नव वर्ष, गंगा में समर्पित हो रही थीं निर्भया की अस्थियां

एक जनवरी 2013 को देश नववर्ष के जश्न में डूबा था और उसी समय भरौली गंगा तट पर निर्भया के अस्थि कलश का विसर्जन किया गया।  हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे। आरोपी राम सिंह, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा, अक्षय सिंह एवं नाबालिग राज मोहम्मद को फांसी देने की मांग उठने लगी थी। निर्मम घटना के बाद पूरे देश में गुस्से की आग से केंद्र सरकार भी सकते में थी। निर्भया के बलिया जिले के नरही क्षेत्र स्थित पैतृक घर नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। घर पहुंचने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, रामकृपाल यादव, तत्कालीन भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, एमसीडी के राजेश्वर नागपाल आदि शामिल थे। तब यहां आए मारीशस के आरपीएन सिंह ने निर्भया के भाई की पढ़ाई अपने यहां कराने की बात कही। निर्भया की तेरहवीं में 11 जनवरी 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी गांव में पहुंचे। तत्कालीन राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी, सांसद नीरज शेखर के साथ निर्भया के घर पहुंच कर अखिलेश यादव ने 25 लाख रुपये का चेक दिया। निर्भया के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं गांव आने वाली सड़क की मरम्मत कराने की घोषणा की। अस्पताल, सड़क का निर्माण भी किया गया...

निर्भया कांड के गुनहगारों को फांसी। - फोटो : self

20 मार्च 2020 को निर्भया के गुनहगारों को लगी फांसी


यूपीए सरकार ने एक फरवरी 2013 को निर्भया मामले में आरोपियों को सजा-ए-मौत की मंजूरी दी। नया कानून पाक्सो एक्ट बना। दो फरवरी को 13 धाराओं में आरोप तय हुआ। निर्भया की कानूनी लड़ाई पटियाला हाउस कोर्ट के साथ हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई। मुकदमे की अहम कड़ी बस में निर्भया के साथ रहे चश्मदीद गवाह अवनींद्र पांडे तथा निर्भया को सड़क से उठाकर सफदरगंज अस्पताल ले जाने वाले राम कुमार की गवाही रही। कानूनी लड़ाई चल ही रही थी कि राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली। नाबालिग आरोपी सुधार गृह में तीन साल रहने के बाद वर्ष 2015 में रिहा कर दिया गया।  सात साल बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने 2020 में 22 जनवरी को फांसी देने का डेथ वारंट जारी किया, लेकिन फांसी टल गई। एक फरवरी एवं तीन मार्च को भी डेथ वारंट जारी हुआ लेकिन फिर टल गया। 20 मार्च को सुबह 5:30 बजे चौथी बार डेथ वारंट जारी हुआ। इसे भी टालने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई हथकंडा काम नहीं आया। अंत में मुकेश (32), पवन (25), विनय (26) और अक्षय कुमार (31) के गले में फांसी का फंदा पड़ ही गया। अब गांव के लोग चाहते हैं कि निर्भया की ज्योति देश में जलती रहे...

निर्भया कानून के तहत ही जेल गए आशाराम और राम रहीम


16 दिसंबर को दिल्ली में निर्भया के साथ हुई गैंगरेप की घटना के बाद बने निर्भया कानून और पाक्सो एक्ट के अस्तित्व में आने के बाद देश के बड़े धर्मगुरुओं आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाई गई। कई नेताओं एवं बाहुबलियों की भी गिरफ्तारियां हुईं। निर्भया कांड के बाद कई धाराओं में बदलाव किए गए, जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट भी अहम हिस्सा है। गलत तरीके से छेड़छाड़ या अन्य तरीके से यौन शोषण को भी रेप की धाराओं में शामिल किया गया। यह एक्ट बच्चों के सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल एसॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों में सुरक्षा प्रदान करता है। 22 दिसंबर 2015 को राज्यसभा में जुवेनाइल जस्टिस बिल भी पास हुआ। इस एक्ट में प्राविधान किया गया कि 16 साल या उससे अधिक उम्र के किशोर को जघन्य अपराध करने पर कोई छूट न दी जाए, बल्कि उसे वयस्क मानकर मुकदमा चलाया जाए। इसके पहले दुष्कर्म के किशोर आरोपी कम उम्र का हवाला देकर सजा से बचने की कोशिश करते थे। इस बिल के तहत ऐसा माना गया कि कोई 16 साल का किशोर भले ही वयस्क की आयु यानी 18 वर्ष से कम उम्र का हो लेकिन अगर उसने दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध किया है तो उसे वयस्क माना जाएगा...
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घर पर सांकेतिक रूप से मनाई जाएगी आठवीं बरसी


निर्भया की आठवीं बरसी पर निर्भया के माता-पिता ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि कोरोना काल के मद्देनजर बरसी दिल्ली में घर पर ही सांकेतिक रूप से मनाई जाएगी। श्रद्धांजलि सभा घर पर ही संपन्न होगी। निर्भया के बाबा ने भी बताया कि कोरोना महामारी के कारण बलिया स्थित पैतृक गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर श्रद्धांजलि सभा की जाएगी। निर्भया ज्योति ट्रस्ट की संचालिका आर्या पांडेय ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा में पुष्पांजलि के बाद कैंडल जलाई जाएगी। कोरोना के चलते श्रद्धांजलि सभा को सीमित कर दिया गया है। इस श्रद्धांजलि सभा में रेड ब्रिगेड ट्रस्ट की लड़कियां भी शिरकत करेंगी।
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