निर्भया जब सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, तभी उसने मां से कहा था- मां मैं अभी जीना चाहती हूं। उसकी मां को उसके ये शब्द आज भी कचोटते हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने कहा था, बेटी तू जरूर जीएगी, तो उसने कहा था कि मां यदि मैं नहीं बची तो दरिंदों को सजा जरूर दिलाना, उन्हें उनके किए की सजा मिलनी ही चाहिए, यह कहते हुए मां आज भी रो पड़ती हैं।
वह कहती हैं कि बेटी के इन अंतिम शब्दों को पूरा कराने के लिए ही उन्होंने पति के संग कंधे से कंधा मिलाकर निर्भया के लिए न्याय की लड़ाई में उनका साथ दिया। आज दरिंदों को फांसी पर लटकाने का समय आ गया है। पिता यह कहते हुए फफक पड़ते हैं कि जिस बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना संजोया था, उसकी अर्थी को कंधा देना मेरी जिंदगी का सबसे दुखद पल था।