वाराणसी भाजपा में जश्न
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नगर निगम के पार्षदों के चुनाव में भाजपा को 23 सीटों का फायदा हुआ है। 2017 में पार्टी के 40 पार्षद चुनाव जीते थे। इस बार यह संख्या 63 पहुंच गई है। कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के 21 पार्षद चुनाव जीतकर आए, लेकिन इस बार आठ पार्षद प्रत्याशी ही चुनाव जीत सके हैं। इसका मतलब है कि 13 सीटों का नुकसान हुआ है।
सपा को भी एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार 13 पार्षद प्रत्याशी चुनाव जीत पाए हैं। यह संख्या पिछली बार 14 थी। बसपा को पिछली बार दो सीटें मिलीं थीं, लेकिन इस बार खाता नहीं खुल सका। निर्दलीय पार्षदों की संख्या दो बढ़ी है। पिछली बार 13 पार्षद चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार 15 चुनाव जीतकर आए हैं। एक सीट जन अधिकार पार्टी के खाते में गई है।
वाराणसी में जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता
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63 पार्षदों के चुनाव जीतने का फायदा भाजपा को मिलेगा। कार्यकारिणी के 12 में से अकेले भाजपा ही आठ सदस्य हो सकते हैं। बाकी चार सदस्य अन्य पार्टियों के होंगे। मौजूदा सदन की स्थिति के चलते कोई भी विकास कार्य पूरा कराने के लिए सदन की मंजूरी मिलती जाएगी। किसी प्रस्ताव पास होने में दिक्कत नहीं आएगी। बताया जा रहा है कि 15 निर्दलीय चुनाव जीतकर आए हैं। तमाम निर्दलीय भाजपा में जाने के लिए तैयार हैं। जैसे ही मौका मिलेगा, भाजपा की सदस्यता भी ग्रहण कर लेंगे। कम पार्षद जीतने की वजह से सपा, कांग्रेस व बसपा को विपक्ष की भूमिका निभाने में दिक्कत आएगी। किसी प्रस्ताव को जोरदार तरीके से विरोध नहीं कर पाएंगे।
भाजपा ने 100 वार्डों पर पार्षद प्रत्याशी उतारे थे। सपा ने 99 और कांग्रेस ने 97 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। बसपा ने 60 और आम आदमी पार्टी ने 35 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इनके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इस बार कुल 637 प्रत्याशी पार्षद के चुनाव मैदान में रहे।
कांग्रेस ने 86 वार्डों से अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन आठ पर ही जीत मिल सकी। 65 से अधिक सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। पार्टी की इस करारी हार ने कांग्रेस नेताओं को आत्ममंथन करने पर विवश कर दिया है।
नगर निगम के सौ वार्डों में से कांग्रेस ने 86 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे थे। बाकी 14 वार्ड में कांग्रेस का कोई उम्मीदवार ही नहीं था। पार्टी का दावा है कि चार वार्ड में उनका नामांकन निरस्त हो गया था और बाकी जगहों पर उन्होंने निर्दल उम्मीदवार को समर्थन दिया था। पार्टी ने दावा किया था वह पिछले साल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन सारे दावे हवा-हवाई हो गए। जिन वार्ड में जीत मिली है, वह मुस्लिम बहुल इलाके हैं।