अस्सी घाट के सामने गंगा के नदी तल पर खड़ी कर दी गई थीं टेंट सिटी
अस्सी घाट के सामने गंगा नदी के दाहिने तट और नदी तल पर दो निजी कंपनियों प्रवेज कम्युनिकेशंस (इंडिया) लिमिटेड और निरान टेंट सिटी को पर्यटन उद्देश्य से टेंट सिटी विकसित करने की अनुमति दी गई थी। यह टेंट सिटी जनवरी 2023 से मई 2023 तक संचालित रहीं। टेंट सिटी के लिए भूमि वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के माध्यम से दी गई थी।
कछुआ संरक्षण क्षेत्र को लेकर भी उठे सवाल
संयुक्त समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस क्षेत्र में टेंट सिटी स्थापित की गई, वह पहले कछुआ (टर्टल) वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत था। कछुआ अभयारण्य के डि-नोटिफिकेशन का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण एनजीटी ने इस मुद्दे पर अंतिम टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन इसे गंभीर पर्यावरणीय विषय बताया।
वीडीए और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि टेंट सिटी के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से पूर्व अनुमति नहीं ली थी। इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और नियमों का पालन कराया गया होता, तो गंगा के नदी तल पर इस तरह का निर्माण नहीं होता।
पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय, लेकिन अब तक वसूली नहीं
यूपीपीसीबी ने दोनों टेंट सिटी संचालकों पर जनवरी से मई 2023 के बीच बिना अनुमति संचालन के लिए 17.12 लाख रुपये प्रति कंपनी की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई थी। हालांकि, एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक यह राशि वसूल नहीं की जा सकी है। ट्रिब्यूनल ने यूपीपीसीबी और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर वसूली सुनिश्चित की जाए।