2047 के लिए मीडिया साक्षरता भी उतनी ही जरूरी
आईआईएमसी दिल्ली में पत्रकारिता विभाग के हेड प्रो. राकेश उपाध्याय ने कहा कि कोई समाज तब तक नहीं बढ़ सकता जब तक उनको सूचनाएं प्रभावी रूप से न मिले। भारत 2047 के लिए मीडिया साक्षरता उतनी ही आवश्यक है जितनी तकनीकी साक्षरता।
बीएचयू के रेक्टर प्रो. संजय कुमार ने कहा कि महामना ने शिक्षित मनुष्य बनाने की कल्पना की थी। हम विकसित भारत का सपना देख रहे उसके लिए हमें अभी से काम करना होगा ताकि वो 2047 तक पूरा हो जाए। तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शंभूनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर भारत के दृष्टिकोण से विकसित भारत 2047 की बात की।
महिला आधारित पुस्तक का हुआ लोकार्पण
इस दौरान एक निजी स्कूल की छात्रा अनन्या चौबे ने अपनी मां प्रोमिता चौबे की पुस्तक लिंग, भविष्य, स्त्री शक्ति, परिवर्तन एवं 21वीं सदी की संभावनाएं का लोकार्पण अतिथियों की उपस्थिति में कराया। कार्यक्रम में 100 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और शोधार्थी आदि मौजूद रहे।
संयोजक डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्रा ने कहा कि यह सम्मेलन विकसित भारत की तैयारियों को शिक्षा, संस्कृति और नवाचार की समानांतर धाराओं से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस दौरान पत्रकारिता विभाग से डॉ. बाला लखेंद्र, डॉ. नेहा पांडेय, राजनीति विज्ञान विभाग से डॉ. मालवीय आदि मौजूद रहे।
स्थानीय जरूरतों और वैश्विक अवसरों को जोड़ना होगा
कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि शिक्षा केवल जीविका का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संस्कारित, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की प्रक्रिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा सलाहकार प्रो. शशिकांत शर्मा ने अपने प्रदेश में शिक्षा सुधारों के उदाहरण देकर बताया कि स्थानीय जरूरतों और वैश्विक अवसरों को जोड़कर शिक्षा प्रणाली को और सशक्त किया जा सकता है। पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष प्रो. शोभना नार्लिकर ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार-संकलन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र के विचारों, संवेदनाओं और दिशा का निर्माण करने वाला आधार-स्तंभ है।